Hamara Hathras

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हाथरस 06 अक्टूबर । आतिशबाजी और पटाखों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले रासायनिक पदार्थों के अवैध भंडारण और कारोबार को लेकर हाथरस पुलिस-प्रशासन सतर्क हो गया है। फरीदाबाद क्राइम ब्रांच द्वारा करीब 2496 किलो रासायनिक सामग्री बरामद किए जाने के बाद जांच के तार हाथरस से जुड़ने की जानकारी सामने आई है। इसके बाद स्थानीय पुलिस और एसओजी ने संदिग्ध गोदामों, कारोबारियों और रासायनिक सामग्री की सप्लाई से जुड़े ठिकानों पर निगरानी बढ़ा दी है। फरीदाबाद पुलिस ने पटाखे बनाने में इस्तेमाल होने वाली बड़ी मात्रा में रासायनिक सामग्री बरामद करने के मामले में पुनीत नाम के आरोपी को गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि बरामद सामग्री हाथरस से लाई गई थी। उसने हाथरस की दो फर्मों के नाम भी बताए। इसके बाद फरीदाबाद क्राइम ब्रांच की टीम हाथरस पहुंची और संदिग्ध सप्लाई नेटवर्क से जुड़े लोगों और ठिकानों की जानकारी जुटाई।

हाथरस पहुंची फरीदाबाद क्राइम ब्रांच

फरीदाबाद क्राइम ब्रांच की टीम ने हाथरस में कार्रवाई करते हुए बालापट्टी निवासी एक माचिस कारोबारी को पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई। कार्रवाई की जानकारी मिलते ही स्थानीय कारोबारियों में खलबली मच गई। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि हाथरस से फरीदाबाद तक रासायनिक सामग्री किस माध्यम से पहुंची और इतनी बड़ी मात्रा में पोटेशियम नाइट्रेट व अन्य सामग्री किससे खरीदी गई थी।बी जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि बरामद रसायन का इस्तेमाल कहां और किस उद्देश्य से किया जाना था। मामले में सामने आए कारोबारियों और फर्मों से जुड़े दस्तावेजों तथा सप्लाई चैन की भी जांच की जा रही है।

जलेसर से हाथरस तक सप्लाई नेटवर्क की आशंका

बताया जा रहा है कि एटा के जलेसर और आसपास के क्षेत्रों में पोटेशियम नाइट्रेट तैयार किए जाने के बाद हाथरस के कुछ कारोबारी इसकी सप्लाई देश के अलग-अलग हिस्सों तक करते हैं। हाथरस के सासनी क्षेत्र में भी पूर्व में इस तरह के कारोबार से जुड़ी फैक्ट्रियों पर कार्रवाई हो चुकी है। वर्ष 2021 में सासनी क्षेत्र में कलमी शोरा बनाने वाली एक फैक्टरी को प्रशासन द्वारा सील किए जाने का मामला सामने आया था। इसके अलावा आतिशबाजी और रासायनिक सामग्री से जुड़े मामलों में हाथरस का नाम पहले भी जांच एजेंसियों के सामने आ चुका है।

पश्चिम बंगाल और देवास की घटनाओं के बाद भी सामने आया था नाम

वर्ष 2023 में पश्चिम बंगाल के दत्तपुकुर में पटाखा फैक्टरी विस्फोट के बाद एसटीएफ की जांच में हाथरस की एक फर्म से 50-50 किलो के 10 कट्टे कलमी शोरा हावड़ा भेजे जाने की जानकारी सामने आई थी। वहीं मई 2026 में देवास पटाखा फैक्टरी विस्फोट के बाद गठित एसआईटी भी हाथरस पहुंची थी। सासनी के एक कारोबारी की फर्म से पोटेशियम नाइट्रेट की सप्लाई की आशंका को लेकर पूछताछ की गई थी। सहपऊ क्षेत्र में भी 132 किलो निर्मित-अर्धनिर्मित पटाखे और कच्चा माल बरामद किया जा चुका है।

सितंबर में सिकंदराराऊ में भी पकड़ी गई थी रासायनिक सामग्री

सितंबर 2026 में सिकंदराराऊ क्षेत्र में दो लोगों को करीब 45 किलो रासायनिक सामग्री के साथ पकड़े जाने की कार्रवाई भी सामने आई थी। अब फरीदाबाद में हुई बड़ी बरामदगी के बाद हाथरस का नाम सामने आने से पुलिस और खुफिया एजेंसियां और अधिक सतर्क हो गई हैं। दिवाली के दौरान पटाखों और आतिशबाजी की मांग बढ़ने के साथ इन रसायनों की मांग भी बढ़ जाती है। ऐसे में पुलिस की नजर अवैध भंडारण, संदिग्ध सप्लाई और बिना अनुमति संचालित गतिविधियों पर है।

अवैध भंडारण मिला तो होगी कार्रवाई

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बिना अनुमति अथवा निर्धारित सुरक्षा मानकों के विपरीत विस्फोटक प्रकृति के रसायनों का भंडारण और आतिशबाजी निर्माण नहीं होने दिया जाएगा। विशेष रूप से रिहायशी इलाकों में अवैध रूप से रसायनों का भंडारण पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। फरीदाबाद में रासायनिक सामग्री की बड़ी खेप पकड़े जाने के बाद एसओजी को निगरानी के लिए सक्रिय किया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि हाथरस से फरीदाबाद तक रासायनिक सामग्री की सप्लाई का नेटवर्क कितना बड़ा है और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं। सर्विलांस और खुफिया सूचनाओं के आधार पर सामने आ रहे अन्य संदिग्ध कारोबारियों पर भी नजर रखी जा रही है।

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