
हाथरस 28 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशों और जनपद न्यायाधीश विनय कुमार-तृतीय के आदेशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, हाथरस की ओर से विधिक साक्षरता क्लबों को अधिक प्रभावी और सक्रिय बनाने के उद्देश्य से नोडल शिक्षकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम जनपद न्यायालय के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की प्रभारी सचिव आकांक्षा गर्ग उपस्थित रहीं। प्रशिक्षण के दूसरे दिन जिले के 39 विद्यालयों के नोडल शिक्षकों को विद्यार्थियों में संवैधानिक जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षित किया गया। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को भारतीय संविधान, उनके मौलिक अधिकारों, कर्तव्यों और कानूनी प्रावधानों के प्रति जागरूक करना है। आकांक्षा गर्ग ने कहा कि विधिक साक्षरता क्लबों के माध्यम से विद्यार्थियों में संवैधानिक चेतना विकसित की जाएगी। इन क्लबों के जरिए छात्र-छात्राओं को संविधान की प्रस्तावना, मौलिक अधिकारों एवं कर्तव्यों, राज्य के नीति-निदेशक तत्वों और समाज के वंचित वर्गों के लिए उपलब्ध निःशुल्क विधिक सहायता की जानकारी दी जाएगी।
प्रथम सत्र में न्यायिक मजिस्ट्रेट खुशबू चन्द्रा, सिविल जज (जू.डि.)/एफटीसी द्वितीय अरिजीत सिंह और सिविल जज (जू.डि.)/एफटीसी प्रथम रोबिन कुमार ने नोडल शिक्षकों को ‘संविधान पर संवाद’ राष्ट्रीय अभियान के अंतर्गत प्रशिक्षण दिया। इस दौरान संविधान निर्माण, संविधान निर्माताओं के योगदान, प्रस्तावना, मौलिक अधिकारों, संवैधानिक उपचारों तथा अनुच्छेद 32 और 226 के महत्व पर जानकारी दी गई। न्यायिक अधिकारियों ने बताया कि संविधान सभा ने 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन के परिश्रम के बाद देश को संविधान प्रदान किया। प्रशिक्षण के दूसरे सत्र में चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल ऋतुराज सिंह और असिस्टेंट लीगल एड डिफेंस काउंसिल आशुतोष गौतम ने राज्य के तीन प्रमुख अंगों—विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका—की भूमिका समझाई। इसके साथ ही बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कानूनों, जैसे पॉक्सो एक्ट, बाल विवाह निषेध कानून और बाल श्रम उन्मूलन अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी दी गई।
तीसरे सत्र में मध्यस्थ अधिवक्ता रमेश चन्द्र वर्मा और संदीप वर्मा ने निःशुल्क विधिक सहायता तथा लोक अदालत की उपयोगिता के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 39ए समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता की व्यवस्था सुनिश्चित करने से संबंधित है। आर्थिक या अन्य अक्षमताओं के कारण कोई भी व्यक्ति न्याय से वंचित न रहे, इसके लिए पात्र जरूरतमंदों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाती है। अधिवक्ताओं ने लोक अदालत को सुलभ और त्वरित न्याय का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए कहा कि इसमें आपसी सहमति और समझौते के आधार पर मामलों का निस्तारण किया जाता है। इससे समय और धन की बचत होती है। प्रशिक्षण के दौरान नोडल शिक्षकों को राष्ट्रीय विधिक सहायता हेल्पलाइन नंबर 15100 की जानकारी भी दी गई, ताकि वे विद्यार्थियों के माध्यम से इस सुविधा के बारे में आम लोगों को जागरूक कर सकें।
कार्यक्रम में नोडल शिक्षकों को विद्यालयों में संवैधानिक जागरूकता से जुड़ी रचनात्मक गतिविधियां आयोजित करने और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के तरीके बताए गए। आगामी 26 नवंबर को संविधान दिवस के अवसर पर प्रस्तावित जनपद स्तरीय प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता की तैयारियों, नियमों और रूपरेखा के बारे में भी जानकारी दी गई, जिससे विद्यार्थी विद्यालय स्तर पर बेहतर तैयारी कर सकें। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में कानूनी जानकारी और संवैधानिक मूल्यों का प्रसार करने के साथ-साथ उनमें अधिकारों के प्रति जागरूकता, कर्तव्यों के निर्वहन और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है।










