सिकन्दराराऊ 25 जून । उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निबंधन विभाग के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में अधिवक्ताओं, कातिबों, स्टाम्प विक्रेताओं एवं टाइपिस्टों का संयुक्त आंदोलन बुधवार को 16वें दिन भी पूरे जोश और एकजुटता के साथ जारी रहा। उप-पंजीयक कार्यालय परिसर में चल रहे धरना-प्रदर्शन एवं कलमबंद हड़ताल के दौरान आंदोलनकारियों ने सरकार से निजीकरण संबंधी प्रस्ताव को तत्काल वापस लेने की मांग दोहराई। धरना सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि निबंधन विभाग का निजीकरण केवल अधिवक्ताओं, कर्मचारियों और कातिबों की आजीविका पर ही नहीं, बल्कि आम जनता के हितों पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि निजीकरण से व्यवस्था की पारदर्शिता एवं जवाबदेही प्रभावित हो सकती है, जिससे लोगों को अतिरिक्त आर्थिक एवं प्रशासनिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। अधिवक्ताओं ने सरकार से जनभावनाओं का सम्मान करते हुए प्रस्तावित निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। आंदोलनकारियों द्वारा निजीकरण के विरोध में एक ज्ञापन भी सौंपा गया, जिसमें रोजगार पर पड़ने वाले प्रभाव तथा आम जनता को होने वाली संभावित परेशानियों का विस्तार से उल्लेख किया गया। धरना सभा की अध्यक्षता दी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष डी.के. चौहान ‘शोला’ ने की तथा संचालन आनन्द कुमार सिंह एडवोकेट ने किया। वक्ताओं ने कहा कि लगातार 16 दिनों से जारी यह संघर्ष अब जनआंदोलन का स्वरूप लेता जा रहा है और विभिन्न सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों का समर्थन भी आंदोलन को प्राप्त हो रहा है। धरना स्थल पर उपस्थित सभी आंदोलनकारियों ने एक स्वर में संकल्प लिया कि जब तक निजीकरण का प्रस्ताव वापस नहीं लिया जाता, तब तक उनका संघर्ष निरंतर जारी रहेगा।
इस अवसर पर युवराज सिंह चौहान, गौरी शंकर गुप्ता, नरेश प्रताप, विपिन कुमार, देवेंद्र दीक्षित ‘शूल’, राजेश बघेल (सचिव), चन्द्रभान सिंह बघेल, महेश अंजना, प्रियांशु दरगढ़, विजय उपाध्याय, भगवान सिंह, दीपेश पाठक, अवधेश कुमार बघेल (समाजसेवी), राकेश यादव (समाजसेवी), समाज प्रिय रत्न, अमित कुमार बघेल, देव कांत कौशिक, कोमल सिंह, मुनेश यादव, श्रीकृष्ण, जितेन्द्र कुमार, उदयवीर सिंह, महेंद्र यादव, दिनेश माहौर, राजेश यादव, श्रीनिवास मुनीम, देवेंद्र कुमार संत, ब्रजेश यादव एडवोकेट, ऋषभ शर्मा सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता, कातिब, स्टाम्प विक्रेता एवं टाइपिस्ट उपस्थित रहे।

























