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Hamara Hathras

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हाथरस 19 सितम्बर। मेला श्री दाऊजी महाराज के ब्रजभाषा कवि सम्मेलन मंच पर काव्य की रसधार बही। ब्रजभाषा, हास्य-व्यंग्य, वीर रस, गीत और छंदों से सजे कवि सम्मेलन में कवियों ने अपनी रचनाओं से देर रात तक श्रोताओं को बांधे रखा। कवियों की प्रस्तुतियों पर जहां जमकर तालियां बजीं, वहीं हास्य-व्यंग्य की रचनाओं ने श्रोताओं को ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया। कवि सम्मेलन से पहले काका हाथरसी की आवागमन तिथि के अवसर पर विशेष काव्य पाठ आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अमृत सिंह पौनिया ने की, जबकि पालिकाध्यक्ष श्वेता दिवाकर एवं बीके शांता बहन मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहीं। समन्वयक एवं उपजिलाधिकारी श्री राजबहादुर सिंह ने काका हाथरसी की कविताओं के वाचन क्रम की शुरुआत गणपति वंदना ‘गणपति बप्पा मोरया’ और ‘दहेज की बारात’ के वाचन से की। काका हाथरसी की कविताओं का काव्य पाठ संयोजक आशु कवि अनिल बौहरे के संचालन में हुआ। इस दौरान श्वेता दिवाकर, शांता बहन, अनु विमल, बाला शर्मा, अनीता गोयल, इन्द्रा जेसवाल, डिम्पल बार्ष्णेय, वन्दना बार्ष्णेय, माधुरी बार्ष्णेय, श्वेता बार्ष्णेय, चाहत शर्मा, प्रियांशी बार्ष्णेय, मनु दीक्षित ‘मनु’, रूपम कुशवाह, मधु शर्मा, सोनाली बार्ष्णेय, सुरेश अग्रवाल, सुरेन्द्र बांठिया, अनिल तेलबाले, सत्यप्रकाश रंगीला, गोपाल चतुर्वेदी, विद्यासागर विकल, रजनी त्रिवेदी और हिमांशु त्रिवेदी ने काका की कविताओं का वाचन किया। इसके बाद डॉ. मुरारी लाल अग्रवाल, आशु कवि अनिल बौहरे और चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य ने अपनी प्रस्तुतियों से जनसमूह को खूब हंसाया और कार्यक्रम को यादगार बना दिया।

इसके बाद ब्रजभाषा कवि सम्मेलन का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। सांसद अनूप प्रधान, जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा उपाध्याय, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रेम सिंह कुशवाह, पूर्व राज्यमंत्री मकुल उपाध्याय, पूर्व जिलाध्यक्ष गौरव आर्य, भाजपा उपाध्यक्ष रजत चौधरी, महामंत्री राजेश सिंह गुड्डू, सुनील वर्मा सहित अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कवि सम्मेलन का विधिवत शुभारंभ किया। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न स्मृति सम्मानों से कवियों एवं साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। पं. सुरेश चतुर्वेदी सम्मान आरती मदरासी को प्रदान किया गया। संत हाथरसी सम्मान भगवान मकरन्द, परमार्थी सम्मान चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य, आचार्य रघुवीर प्रसाद त्रिवेदी ‘गाफिल’ सम्मान स्वामी को, सेठ अमरचंद हजारीमल बांठिया सम्मान मीरा दीक्षित तथा लालाराम पचौरी सम्मान गोपाल चतुर्वेदी मथुरा को प्रदान किया गया। अतिथि सम्मान कार्यक्रम के सह संयोजक जीवन लाल शर्मा, मुकेश शर्मा और अतुल आंधीबाल ने कराया। ब्रजभाषा कवि सम्मेलन में रामबाबू सिकरवार धौलपुर ने पैरोडी ‘दय्या दय्या दय्या रे’ से समां बांधा। मोहित सक्सेना आगरा ने वीर रस की कविताओं से श्रोताओं में उत्साह भरा। भगवान मकरन्द, कुंवरपाल उपाध्याय और गोपाल चतुर्वेदी मथुरा ने हास्य-व्यंग्य की प्रस्तुतियों से जमकर ठहाके लगवाए। चच्चा उदयभानी अलीगढ़ और अक्षय चतुर्वेदी मथुरा ने छंदों की प्रस्तुति दी, जबकि पूनम शर्मा अलीगढ़ और रेनू उपाध्याय मथुरा ने गीतों के माध्यम से मंच को भावपूर्ण बना दिया।

कवि सम्मेलन का विशेष आकर्षण दक्षिण भारत की ब्रजभाषा कवयित्री आरती मदरासी रहीं। उन्होंने करीब 20 मिनट के काव्य पाठ में अपनी कविता के माध्यम से श्रोताओं को पूरे भारत की यात्रा करा दी। उन्होंने ब्रज के कान्हा से लेकर दक्षिण भारत के खान-पान और संस्कृति तक को ब्रजभाषा के रंग में पिरोते हुए अपनी प्रस्तुति दी। उनकी पंक्तियों में ब्रज की माखन-मिश्री से लेकर दक्षिण भारत की इडली-डोसा और गोविंदा तक का सुंदर समावेश देखने को मिला। आरती मदरासी, जो दक्षिण भारत की ब्रजभाषा की प्रमुख कवयित्री और आशु कवि अनिल बौहरे की शिष्या हैं, ने हाथरस में ढोल-नगाड़ों के बीच आयोजित इस कवि सम्मेलन को लेकर प्रसन्नता जताई। उन्होंने कहा कि कविता और ब्रजभाषा के प्रति ऐसा उत्साह उन्हें हाथरस में देखने को मिला, जो उनके लिए विशेष अनुभव रहा। इसके बाद रोशन लाल वर्मा, रसराज, जय प्रकाश पचौरी, चेतन उपाध्याय और पूरन सागर ने काव्य पाठ किया। अंत में वरिष्ठ ब्रज कवि राधा गोविंद पाठक के अध्यक्षीय काव्य पाठ के साथ कवि सम्मेलन का समापन हुआ। देर रात तक चले इस आयोजन में श्रोता कवियों की प्रस्तुतियों का आनंद लेते रहे और पूरा मेला परिसर तालियों एवं ठहाकों से गूंजता रहा।

 

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