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सासनी 01 नवंबर। नगर की बुजुर्गों एवं कवियों की सामाजिक-साहित्यिक संस्था साहित्यानंद के तत्वावधान में आयोजित कवि गोष्ठी में भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री एवं आयरन लेडी श्रीमती इंदिरा गांधी तथा लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल को याद करते हुए कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से काव्यात्मक श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए हास्य कवि खमानी राम ने कहा कि देश की आजादी और राष्ट्र निर्माण में सरदार वल्लभ भाई पटेल तथा इंदिरा गांधी के योगदान को देश कभी नहीं भुला सकता।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि कैलाश भूमिधर और कार्यक्रम अध्यक्ष खमानी राम ने मां सरस्वती के छवि चित्र के समक्ष संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद मुरारी लाल मधुर ने सस्वर सरस्वती वंदना प्रस्तुत की और अपनी रचना के माध्यम से कहा, “बच्चे देखें भविष्य को, युवा लखें वर्तमान, वयोवृद्ध को भूत ही देता रहा सम्मान।” कवि अशोक मिश्रा ने सरदार पटेल को याद करते हुए सुनाया, “यूं ही नहीं बन गए लौह पुरुष पटेल, अंग्रेजों को हिम्मत से दिया धकेल।” वहीं कवि रामनिवास उपाध्याय ने गांधीजी, नेहरू और पटेल के संदर्भ में अपनी रचना प्रस्तुत की। हास्य कवि वीरपाल सिंह वीर ने अपनी हास्य कविताओं से श्रोताओं का खूब मनोरंजन किया। उनकी पंक्तियां “जी भर के जिंदगी का मजा लीजिए, घर अपना बाहरवाली से सजा लीजिए” सुनकर श्रोता हंसी से खिलखिला उठे। कवि विष्णु शर्मा ने नारी के विभिन्न रूपों और उसके सम्मान को रेखांकित करते हुए कहा, “नारी है एक, जिसके रूप हैं अनेक, हर रूप में नारी सम्मान पाती है।” महेंद्र पाल सिंह ने ग्रामीण परिवेश और युवा पीढ़ी की जीवनशैली को अपनी रचना के माध्यम से प्रस्तुत किया—”धोती कुर्ता पहन बगबगौ लल्लू कॉलेज जाए, लंबी चोटी हाथ में सोटी माथे तिलक लगाए।”

कवि रविराज सिंह ने जागरूकता का संदेश देते हुए सुनाया, “सदियों तक तुम सोते रहे, अब तो जागो भाई, अब भी नहीं जगे यदि तुम तो होगी बहुत हंसाई।” इसके बाद कवि पप्पू टेलर ने जीवन की कठिनाइयों और ईश्वर की इच्छा को समर्पित रचना प्रस्तुत करते हुए कहा, “क्या किस्मत में लिखा विधाता, क्यों लीनी कठिन परीक्षा है, ठुकरा दो या गले लगा लो, प्रभो तुम्हारी इच्छा है।” व्यंग्य कवि वीरेंद्र जैन ‘नारद’ ने वर्तमान साहित्यिक परिस्थितियों पर व्यंग्य करते हुए सुनाया, “खामोशी वाचाल हो गई, कविता मालामाल हो गई, कैसे कोई सृजन करे, जब शब्दों की हड़ताल हो गई।” कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि रामचरन बघेल ने सभी कवियों से समाज को सकारात्मक दिशा देने वाली संदेशात्मक कविताओं के सृजन का आह्वान किया। अंत में सभी अतिथियों एवं कवियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कवि गोष्ठी का औपचारिक समापन किया गया। कार्यक्रम का कुशल संचालन कवि पप्पू टेलर ने किया।

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