हाथरस 29 अक्टूबर । उत्तर प्रदेश में पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट आने में देरी के कारण चयनित युवाओं की नौकरी नहीं रुकेगी। सामान्य पदों पर निर्धारित नियमों के तहत अस्थायी नियुक्ति दी जा सकेगी, जबकि पुलिस की जांच साथ-साथ जारी रहेगी। पुलिस को 30 दिन के भीतर सत्यापन रिपोर्ट देनी होगी। हालांकि, सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील पदों पर सत्यापन पूरा होने से पहले यह छूट लागू नहीं होगी। सासनी निवासी भाजपा के प्रदेश मंत्री एवं प्रदेश मीडिया प्रभारी यतेन्द्र शर्मा ने बयान जारी कर यह जानकारी दी।
यतेन्द्र शर्मा ने कहा कि योगी सरकार की इस पहल का उद्देश्य चयनित युवाओं को पुलिस वेरिफिकेशन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में होने वाली देरी से राहत देना है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सपा और बसपा सरकारों के कार्यकाल में परीक्षा पास करने और चयनित होने के बाद भी युवाओं को पुलिस सत्यापन तथा सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे। उनके मुताबिक, नई व्यवस्था से पात्र अभ्यर्थियों की नियुक्ति केवल सत्यापन रिपोर्ट लंबित होने के कारण अनावश्यक रूप से नहीं अटकेगी। भाजपा नेता ने कहा कि किसी अभ्यर्थी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने या जांच लंबित रहने का अर्थ अपने आप नौकरी के लिए अयोग्यता नहीं होगा। मामले की प्रकृति, उपलब्ध तथ्यों और लागू नियमों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा। साथ ही, अभ्यर्थी को अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि गंभीर मामलों में पात्रता का फैसला संबंधित नियमों के अनुसार ही होगा। यतेन्द्र शर्मा ने आरोप लगाया कि कुछ लोग इस पहल को गलत तरीके से प्रस्तुत कर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को फाइलों और तारीखों के चक्कर से राहत देने वाली व्यवस्था पर अनावश्यक भ्रम की स्थिति पैदा नहीं की जानी चाहिए। शर्मा के अनुसार, संबंधित कानून पहले से मौजूद था, लेकिन पिछली सरकारों के कार्यकाल में उसका उचित लाभ युवाओं तक नहीं पहुंच पाया। उन्होंने दावा किया कि योगी सरकार ने ऐसी व्यवस्था लागू की है, जिसमें सत्यापन की प्रक्रिया जारी रहते हुए भी नियमों के तहत अस्थायी नियुक्ति का रास्ता खुल सकेगा और युवाओं का भविष्य अनावश्यक देरी से प्रभावित नहीं होगा। सरकार की नई नीति का उद्देश्य सरकारी नियुक्तियों में चरित्र सत्यापन की प्रक्रिया को स्पष्ट करना, अनावश्यक देरी कम करना और गंभीर आपराधिक मामलों तथा सामान्य आरोपों के बीच अंतर निर्धारित करना है। इससे चयनित अभ्यर्थियों को सत्यापन रिपोर्ट लंबित रहने के कारण होने वाली परेशानी से राहत मिलने की संभावना है, जबकि गंभीर मामलों में पात्रता का निर्णय निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाएगा।










