


























हाथरस 26 मई । एडीजे कोर्ट-छह ने वर्ष 1983 के चर्चित अपहरण एवं हत्या मामले में आठ पुलिसकर्मियों को दोषमुक्त करार दिया है। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष ऐसा कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका, जिससे यह सिद्ध हो सके कि बरामद शव हीरालाल का था अथवा उसकी हत्या पुलिसकर्मियों द्वारा की गई थी। मामला 5 फरवरी 1983 का है, जब चंदपा पुलिस द्वारा एक एनकाउंटर किए जाने का दावा किया गया था। पुलिस के अनुसार मुठभेड़ में एक बड़े बदमाश को मार गिराया गया था, हालांकि उस समय मृतक की शिनाख्त नहीं हो सकी थी। बताया जाता है कि मुठभेड़ में मारे गए व्यक्ति को देखने के लिए मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई थी। उसी दौरान गांव बघना के तत्कालीन प्रधान राजाबाबू ने मृतक की पहचान अर्जुनपुर निवासी हीरालाल के रूप में की थी। उन्होंने इस संबंध में समाजसेवी एवं अधिवक्ता रायवीर सिंह को जानकारी दी थी। राजाबाबू के अनुसार, घटना वाले दिन वह शांति समिति की बैठक में गए थे, जहां उन्होंने हीरालाल को पठानी सूट, जैकेट, सैंडल एवं बड़े बालों के साथ चंदपा थानाध्यक्ष के पास बैठा देखा था। बाद में मुठभेड़ में मारे गए व्यक्ति को उन्होंने हीरालाल बताया था। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण समाजसेवी एवं अधिवक्ता रायवीर सिंह ने मामले की पैरवी की। हालांकि लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में सभी आरोपित पुलिसकर्मियों को दोषमुक्त कर दिया।


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