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मथुरा 08 जनवरी । जीएल बजाज ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूशंस, मथुरा के इंस्टीट्यूशन्स इनोवेशन काउंसिल (आईआईसी) के 152वें नॉलेज शेयरिंग सेशन में रिसोर्स पर्सन अरुण कुमार सिंह (सीईओए) इलेन्टस टेक्नोलॉजीज ने क्वांटम कम्प्यूटिंग और साइबर सुरक्षा पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने क्वांटम कम्प्यूटिंग की मूल अवधारणाओं, मौजूदा साइबर सुरक्षा प्रणालियों पर इसके सम्भावित प्रभाव, क्रिप्टोग्राफी से जुड़ी चुनौतियों तथा भविष्य में उत्पन्न होने वाले साइबर खतरों पर विस्तार से प्रकाश डाला। प्रो. वी.के. सिंह और ने अंगवस्त्र से तथा इंजीनियर ऋचा मिश्रा ने प्लांटर देकर रिसोर्स पर्सन अरुण कुमार सिंह का स्वागत किया। कार्यक्रम के समन्यवयक डॉ. वजीर सिंह ने अतिथि वक्ता के बारे में विस्तार से जानकारी दी। क्या क्वांटम कम्प्यूटिंग साइबर सुरक्षा के लिए वाई2के जैसा संकट ला सकती है, विषय पर श्री सिंह ने कहा कि क्वांटम तकनीक भविष्य की क्रांतिकारी तकनीक है, जो पारम्परिक कम्प्यूटिंग की सीमाओं को तोड़ते हुए अत्यंत जटिल समस्याओं का समाधान करने में सक्षम होगी। श्री सिंह ने कहा कि क्वांटम संचार तकनीक साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित कर सकती है, इससे संवेदनशील डेटा को अभूतपूर्व स्तर की सुरक्षा मिल सकेगी। इसके साथ ही रक्षा, अंतरिक्ष, वित्तीय सेवाओं और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में भी क्वांटम तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

प्रो. नीता अवस्थी ने अपने सम्बोधन में कहा कि भारत ने विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए राष्ट्रीय क्वांटम मिशन को मंजूरी दे दी है। राष्ट्रीय क्वांटम मिशन का उद्देश्य देश में क्वांटम कम्प्यूटिंग, क्वांटम संचार, क्वांटम सेंसिंग और क्वांटम मटेरियल्स जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना है। यह मिशन न केवल वैज्ञानिक नवाचार को गति देगा बल्कि रणनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में भी भारत की क्षमताओं को नई ऊंचाई प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि विषय विशेषज्ञ के साथ संवाद, चर्चा और प्रश्न-उत्तर सत्र के माध्यम से प्रतिभागियों में विषय की गहरी समझ विकसित हुई। इस सत्र में संस्थान के सभी विभागाध्यक्ष तथा बड़ी संख्या में संकाय सदस्य उपस्थित रहे।

संकाय सदस्यों ने कहा कि इससे युवा वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को इस उभरती तकनीक में विशेषज्ञता हासिल करने का अवसर मिलेगा। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होने और भारत को वैश्विक तकनीकी प्रतिभा के केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। वैश्विक परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो क्वांटम तकनीक को लेकर देशों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज होती जा रही है। भारत का राष्ट्रीय क्वांटम मिशन शुरू करना यह संकेत देता है कि देश भविष्य की तकनीकी दौड़ में पीछे रहने का जोखिम नहीं लेना चाहता। यह कदम आत्मनिर्भर भारत की रणनीति और दीर्घकालिक तकनीकी दृष्टि को भी मज़बूती प्रदान करता है।

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