
प्रयागराज 15 जनवरी । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि संयुक्त हिंदू परिवार की संपत्तियों के बंटवारे से जुड़े मामलों को शुरुआती चरण में ही बेनामी लेनदेन मानकर खारिज करना न्यायसंगत नहीं है। न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकल पीठ ने गोरखपुर निवासी ओम प्रकाश गुप्ता और उनके भाई राधेश्याम के बीच संपत्ति विवाद पर जिला अदालत का आदेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि जिला अदालत बिना अनावश्यक स्थगन के एक साल में नया फैसला सुनाए। साथ ही, इस दौरान संपत्ति में किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप पर रोक लगा दी गई है। मामले में वादी ओम प्रकाश का दावा है कि उन्होंने और उनके भाई ने वर्षों तक मिलकर कारोबार किया और संयुक्त बैंक खाते से परिवार के सदस्यों के नाम संपत्तियां खरीदीं। हालांकि, निचली अदालत ने इसे बेनामी लेनदेन मानते हुए अदेश 7 नियम 11 सीपीसी के तहत मुकदमा खारिज कर दिया था। सीपीसी का आदेश 7 नियम 11 अदालत को यह शक्ति देता है कि वह शुरुआती स्तर पर ही मुकदमे को खारिज कर सकती है, यदि वादपत्र में कानूनी आधार की कमी हो, कोर्ट फीस न भरी गई हो, या कानूनन मुकदमा नहीं चल सकता हो। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि भाइयों के इस विवाद में संयुक्त परिवार की संपत्तियों के गहरे तथ्य हैं, जिन्हें साक्ष्यों और ट्रायल के माध्यम से ही सुलझाया जा सकता है।















