
लखनऊ 26 फरवरी । उत्तर प्रदेश सरकार ने मानव संपदा पोर्टल पर अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण दर्ज न करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। मुख्य सचिव एसपी गोयल द्वारा जारी नवीनतम शासनादेश के अनुसार, प्रदेश के 47,816 कर्मचारियों ने निर्धारित समय सीमा (31 जनवरी 2026) तक अपनी संपत्ति का ब्यौरा अपलोड नहीं किया है। अब सरकार ने इन कर्मियों को 26 फरवरी से 10 मार्च 2026 तक का अंतिम अवसर प्रदान किया है, लेकिन साथ ही कड़े दंडात्मक प्रतिबंध भी लागू कर दिए हैं।
वेतन रुका, पदोन्नति पर भी संकट
शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि जिन कर्मचारियों ने विवरण दर्ज नहीं किया है, उन्हें जनवरी और फरवरी माह का वेतन नहीं दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, ऐसे कर्मचारियों को वर्तमान चयन वर्ष में पदोन्नति (प्रमोशन) के लिए अयोग्य माना जाएगा और देय होने पर भी एसीपी (ACP) का लाभ नहीं दिया जाएगा। यदि कोई कर्मचारी विदेश यात्रा या प्रतिनियुक्ति पर जाना चाहता है, तो उसे विजिलेंस क्लीयरेंस भी नहीं मिलेगी।
10 मार्च तक मौका, फिर भी होगी कार्रवाई
सरकार ने राहत देते हुए कहा है कि जो कर्मचारी 10 मार्च तक अपना विवरण पोर्टल पर अपलोड कर देंगे, उन्हें जनवरी और फरवरी का रुका हुआ वेतन तत्काल जारी कर दिया जाएगा। हालांकि, 31 जनवरी की समय सीमा का उल्लंघन करने के कारण इन सभी 47,816 कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई निश्चित रूप से की जाएगी।
लापरवाह अधिकारियों की भी खैर नहीं
आदेश में आहरण-वितरण अधिकारियों (DDO) को भी चेतावनी दी गई है। यदि किसी डिफ़ॉल्टर कर्मचारी का जनवरी 2026 का वेतन नियम विरुद्ध आहरित कर लिया गया है, तो संबंधित आहरण-वितरण अधिकारी के खिलाफ भी सख्त कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।
नियमों की याद दिलाई
बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956 के नियम-24 के तहत सभी कर्मचारियों के लिए अपनी संपत्ति का विवरण देना अनिवार्य है। एनआईसी के आंकड़ों से खुलासा हुआ कि बार-बार चेतावनी के बावजूद बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने इस नियम की अनदेखी की है।















