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लखनऊ 15 जनवरी । बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने अपने 70वें जन्मदिन पर ब्राह्मण समाज के हितों पर जोर देते हुए कहा कि उन्हें सम्मान, प्रतिनिधित्व और रोज़गार चाहिए, किसी का “बाटी-चोखा” नहीं। उन्होंने दावा किया कि बसपा सरकार में ब्राह्मण समाज की इच्छाएँ पूरी हुई थीं और अगली बार सरकार बनने पर ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य समाज के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। मायावती ने भाजपा, सपा और कांग्रेस पर ब्राह्मण समाज की उपेक्षा का आरोप लगाया और कहा कि अब ब्राह्मण समाज को किसी पार्टी के बहकावे में नहीं आना है। उन्होंने यह भी कहा कि बसपा सरकार हमेशा सर्वसमाज के हितों का ध्यान रखती रही है। इस अवसर पर उन्होंने अपनी पुस्तक ‘मेरे संघर्षमय जीवन एवं बीएसपी मूवमेंट का सफरनामा’ के 21वें संस्करण का विमोचन किया। लेकिन प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हॉल में शॉर्ट सर्किट होने से अफरातफरी मच गई और सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला। मायावती ने स्पष्ट किया कि बसपा इस बार सभी चुनाव अकेले लड़ेगी। उनका कहना है कि गठबंधन से पार्टी को नुकसान होता है, खासकर अपर कास्ट वोट पर। भविष्य में भरोसा मिलने पर गठबंधन पर विचार किया जा सकता है, लेकिन इसमें अभी कई साल लगेंगे। उन्होंने ईवीएम में धांधली और एसआईआर कार्य में शिकायतों का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी को चुनावी तैयारियों में सजग रहना होगा। मायावती ने 2 जून 1995 के स्टेट गेस्ट हाउस कांड का जिक्र करते हुए कहा कि सपा शासनकाल में दलितों और पिछड़ों का सबसे ज्यादा उत्पीड़न हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा शासन में केवल गुंडों, माफियाओं और भ्रष्ट लोगों का राज चलता है। बसपा सरकार में किसी भी मंदिर, मस्जिद या चर्च को कोई क्षति नहीं पहुंची। दलित, पिछड़े, मुस्लिम और अल्पसंख्यक समाज के हितों का विशेष ध्यान रखा गया। विरोधी पार्टियों की सरकारों की तरह बसपा सरकार में कोई दंगा-फसाद नहीं होने दिया गया।

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