
नई दिल्ली 12 मार्च । राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान समाजवादी पार्टी के सांसद रामजीलाल सुमन ने छात्रों के पाठ्यक्रम में भारत के संविधान को अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाए जाने की मांग करते हुए कहा कि आज नई पीढ़ी को वैचारिक दृष्टि से स्वस्थ बनाए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने बाबा साहब डॉ अम्बेडकर के कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि संविधान चाहें जितना भी अच्छा क्यों न हो लेकिन उसे लागू करने वाले लोग यदि अच्छे नहीं हैं तो निश्चित रूप से वह संविधान बुरा ही होगा। उन्होंने कहा कि हमने संविधान में समाजवादी एवं पंथनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य को स्वीकार किया है, देश में सांप्रदायिक शक्तियां संविधान के धर्मनिरपेक्ष चरित्र पर हमला कर रही हैं तथा हमारी गंगा-जमुनी संस्कृति को नष्ट करने एवं सामाजिक ताने-बाने को बिगाड़ने का काम किया जा रहा है। हमने स्वीकार किया है कि राज्य का कोई धर्म नहीं होगा और देश में सभी धर्मों का सम्मान होगा। श्री सुमन ने सत्तापक्ष की ओर मुखातिब होते हुए कहा कि सरकार और सांसदों ने शपथ तो संविधान की ली है लेकिन इनका आचरण बिल्कुल उल्टा है। इन्होंने न तो कभी संविधान को स्वीकार किया और न ही बाबा साहब डॉ अम्बेडकर को। उन्होंने कहा कि हमारे राष्ट्रीय आंदोलन के मूल्य तथा जंग-ए-आज़ादी में देश की भावनाओं का समावेश भारतीय संविधान में किया गया है। देश की भावी पीढ़ी मानसिक रूप से स्वस्थ को इसलिए आवश्यक है कि सामाजिक सद्भावना हेतु पाठ्यपुस्तकों में संविधान पढ़ाये जाने की अनिवार्यता को स्वीकार किया जाए।
























