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सिकंदराराऊ (हसायन) 21 फरवरी । विकासखंड क्षेत्र के ग्राम बनवारीपुर स्थित श्री बांके बिहारी जी महाराज के चौबीसवें प्राकट्योत्सव वार्षिकोत्सव समारोह के उपलक्ष्य में आयोजित नौ दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान के तीसरे दिन भक्ति की रसधारा बही। शुक्रवार को वृंदावन के प्रसिद्ध रासाचार्य फतेह कृष्ण शर्मा की बृज रास मंडल के कलाकारों ने भगवान श्रीकृष्ण की मनोहारी बाल लीलाओं का मंचन किया। रासलीला के मंचन में जब कलाकारों ने श्रीकृष्ण की प्राचीन पौराणिक लीलाओं को जीवंत किया, तो पूरा वातावरण ‘जय श्री कृष्णा’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। कार्यक्रम की शुरुआत में कलाकारों ने पूतना वध का प्रदर्शन कर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया।

रासलीला के मुख्य आकर्षण में ‘माखन चोरी’ और ‘ऊखल बंधन’ (दामोदर लीला) का भावपूर्ण मंचन रहा। मंच पर दिखाया गया कि किस प्रकार नन्हे कन्हैया अपनी बाल सुलभ चपलता से गोपियों के घरों में माखन चोरी करते हैं। जब माता यशोदा श्रीकृष्ण की उलाहनाओं से परेशान होकर उन्हें रस्सी (दाम) से ऊखल (ओखली) से बांध देती हैं, तो भक्त इस वात्सल्य दृश्य को देख भाव-विभोर हो गए। रासाचार्य फतेह कृष्ण शास्त्री ने इस प्रसंग की व्याख्या करते हुए बताया कि उदर (पेट) पर रस्सी बंधने के कारण ही प्रभु का नाम ‘दामोदर’ पड़ा। इस दौरान कलाकारों ने सूरदास जी के पदों— “जसुमति रिस करि-करि रजु करषै, सुत हित क्रोध देखि माता कैं, मनहिं मन हरि हरषै” का गायन कर समां बांध दिया।

लीला के अंतिम चरण में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा आंगन में खड़े यमलार्जुन के दो वृक्षों का उद्धार करने के दृश्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रासाचार्य ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि ऊखल बंधन लीला वात्सल्य रस की पराकाष्ठा है। माता यशोदा का तन, मन और वचन पूर्णतः कान्हा की सेवा में समर्पित था, यही सच्ची भक्ति है। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के स्वरूपों की आरती उतारी और प्रसाद वितरित किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में क्षेत्रीय श्रद्धालु मौजूद रहे, जिन्होंने देर रात तक रासलीला का आनंद लिया।

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