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अलीगढ़ 23 मार्च । मंगलायतन विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन एंड रिसर्च द्वारा “नारी शक्ति: भारतीय सांस्कृतिक परंपरा एवं ज्ञान प्रणाली में महिलाओं की भूमिका और प्रतिनिधित्व” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में शिक्षा, संस्कृति और समाज में महिलाओं की भूमिका को विभिन्न आयामों से प्रस्तुत किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य भारतीय सांस्कृतिक परंपरा में नारी की भूमिका को पुनर्स्थापित करना और नई पीढ़ी को इससे अवगत कराना है। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। विद्यार्थियों द्वारा देवी नमस्कार (64 योगिनी) की प्रस्तुति ने कार्यक्रम में आध्यात्मिक वातावरण का संचार किया। डा. प्रेमलता द्वारा काव्य पाठ किया गया। स्वागत भाषण प्रो. दिनेश पांडेय ने दिया, जबकि कार्यक्रम का परिचय डा. प्रीति पंकज गुप्ता ने कराया।

मुख्य वक्ता, राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित एवं कनक धरा फाउंडेशन की संस्थापक प्रो. लक्ष्मी गौतम ने अपने प्रभावशाली व्याख्यान में भारतीय ज्ञान परंपरा में नारी की केंद्रीय भूमिका को अपने जीवन अनुभवों के माध्यम से विस्तारपूर्वक प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि हम उस महान देश की नारियां हैं, जहां स्वयं भारत को माता के रूप में सम्मान दिया जाता है। उन्होंने महिलाओं से आह्वान करते हुए कहा कि वे अपने व्यक्तित्व को संतुलन और सामंजस्य के साथ विकसित करें तथा जीवन को उसी अनुरूप दिशा दें। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नारी को अपनी संस्कृति और मर्यादा का संरक्षण करना चाहिए, लेकिन पुरानी रूढ़ियों और संकीर्ण सोच से स्वयं को मुक्त रखते हुए आगे बढ़ना आवश्यक है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलसचिव ब्रिगेडियर डा. समरवीर सिंह ने ने अपने संबोधन में नारी सशक्तिकरण, शिक्षा और भारतीय परंपरा में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। प्रो. दीपशिखा सक्सेना ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

दोपहर के सत्र की शुरुआत वंदे मातरम् के साथ हुई। इसके बाद सांस्कृतिक गतिविधियों ने कार्यक्रम को जीवंत बना दिया। इस सत्र में एडीएम सिटी किंशुक श्रीवास्तव एवं एसडीएम रश्मि लता का स्वागत किया गया। उन्होंने कहा कि जब भी कल्चर की बात होती है तो उसके केंद्र में नारी ही होती है। कल्चर जीवन में अनवरत चलता है। शक्ति का मंतव्य ही संस्कृति है। सामाजिक बुराई पुराने पुराने समय से अब तक बहुत सारी दूर भी हो चुकी हैं। हमारी संस्कृति बहुत उन्नत है। हमारी भारतीय ज्ञान परंपरा न केवल नारी को बल्कि सभी का मार्गदर्शन करता है। भावना राज ने भी व्याख्यान दिया। डा. प्रेमलता ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन डा. मनीषा उपाध्याय ने किया। सभी अतिथियों को सम्मानित भी किया गया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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