
मथुरा 11 मार्च । मां सरस्वती की पूजा-अर्चना के बाद केडी विश्वविद्यालय में उत्साह और उमंग के बीच उन कामयाब महिला विभूतियों को सम्मानित किया गया जिन्होंने चिकित्सा क्षेत्र के महत्वपूर्ण पहलुओं पर अपनी कामयाबी और सेवाभाव की छाप छोड़ी है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के परिप्रेक्ष्य में विश्वविद्यालय के आडिटोरियम में आयोजित गरिमामय समारोह में करतल ध्वनि के बीच केडी डेंटल कॉलेज की डीन और प्राचार्या डॉ. नवप्रीत कौर, विभागाध्यक्ष मेडिसिन डॉ. मंजू पांडेय तथा केडी कॉलेज आफ नर्सिंग एण्ड पैरा मेडिकल साइंस की प्राचार्या डॉ. नंदीबाम फजाटन चानू को केडी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मनेष लाहौरी, प्रति-कुलपति डॉ. गौरव सिंह, कुलसचिव डॉ. विकास अग्रवाल तथा केडी मेडिकल कॉलेज के डीन और प्राचार्य डॉ. आर.के. अशोका के करकमलों से सम्मानित किया गया।
विश्वविद्यालय के प्रो-चांसलर मनोज अग्रवाल ने अपने संदेश में सम्मानित महिला विभूतियों को बधाई देते कहा कि यह सम्मान भावी पीढ़ी की बेटियों का मार्गदर्शन करेगा। समारोह को सम्बोधित करते हुए कुलपति डॉ. मनेष लाहौरी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस सिर्फ एक तारीख नहीं है, यह महिलाओं के अधिकारों के लिए आवाज उठाने और उन्हें समान अवसर देने का दिन है। महिलाओं ने हर क्षेत्र में अद्भुत काम किए हैं। यह हमें याद दिलाता है कि महिलाओं का सशक्त होना समाज की प्रगति के लिए जरूरी है। हमें हर दिन यह सुनिश्चित करना चाहिए कि महिलाएं अपने जीवन में बिना किसी भेदभाव के आगे बढ़ सकें। डॉ. लाहौरी ने कहा कि यह दिन महिलाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा के लिए नई नीतियों और सुधारों की मांग करने का अवसर भी देता है।

केडी मेडिकल कॉलेज के डीन और प्राचार्य डॉ. आर.के. अशोका ने मनुस्मृति (3.56) के प्रसिद्ध श्लोक यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवताः का जिक्र करते हुए कहा कि हर समयकाल में नारी पूजनीय रही है। इन्होंने विविध रूपों में जीते हुए परिवार, समाज और राष्ट्र का कल्याण किया है। यह दिन हमें उनका समर्थन करने की सीख देता है। महिलाओं की खुशी और सफलता परिवारों और समाज को मजबूत बनाती है। यह दिन महिलाओं के अधिकारों, समाज में उनके योगदान और लैंगिक समानता की आवश्यकता को बताता है।
डॉ. अशोका ने कहा कि यह दिन उन सभी महिलाओं को याद करने और सराहने का है, जिन्होंने शिक्षा, खेल, विज्ञान, कला, राजनीति और अन्य क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यह हमें याद दिलाता है कि महिलाओं को पुरुषों के बराबर अवसर, वेतन और नेतृत्व की जगह मिलनी चाहिए। यह लड़कियों को उनके सपनों को पूरा करने के लिए प्रोत्साहित करता है और उन्हें सशक्त बनाने का संदेश देता है।
समारोह में सम्मानित चिकित्सा विभूतियों डॉ. नवप्रीत कौर, डॉ. मंजू पांडेय तथा डॉ. नंदीबाम फजाटन चानू ने छात्राओं को बताया कि कामयाबी का रास्ता कठिन होता है, लेकिन हम सही मन और मेहनत से उसे सहज बना सकते हैं। डॉ. मंजू पांडेय ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुरुआत 20वीं शताब्दी में हुई थी। 8 मार्च 1908 को न्यूयॉर्क में 15 हजार महिलाओं ने अच्छे कामकाजी हालात, कम घंटे और वोट देने का अधिकार मांगने के लिए प्रदर्शन किया था। इसके बाद 1910 में डेनमार्क की समाजवादी नेता क्लारा जेटकिन ने इस दिन को महिलाओं के सम्मान में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस बनाने का प्रस्ताव रखा। तब से हर साल 8 मार्च को दुनिया भर में महिलाओं के योगदान और अधिकारों को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है। सम्मान समारोह में बड़ी संख्या में महिला विभागाध्यक्ष, महिला चिकित्सक, नर्सेज तथा मेडिकल, डेंटल और नर्सिंग कॉलेज की छात्राएं उपस्थित रहीं। अंत में कुलसचिव डॉ. विकास अग्रवाल में सफल आयोजन के लिए सभी का आभार माना।


























