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मथुरा 20 फरवरी । केडी विश्वविद्यालय, मथुरा के एमबीबीएस छात्र-छात्राओं के एक दल ने दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित एआई समिट में सहभागिता कर चिकित्सा क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित नवीनतम तकनीकों और नवाचारों की जानकारी जुटाई। केडी विश्वविद्यालय के प्रो-वाइस चांसलर डॉ. गौरव सिंह के मार्गदर्शन में शैक्षिक भ्रमण पर गए छात्र-छात्राओं ने आधुनिक चिकित्सा तकनीक, डिजिटल हेल्थ और एआई आधारित रोग निदान प्रणालियों को भी विस्तार से समझा। अपने शैक्षिक भ्रमण में मेडिकल छात्र-छात्राओं ने एआई संचालित मेडिकल इमेजिंग, रोग पूर्वानुमान मॉडल, रोबोटिक सर्जरी, टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म तथा स्मार्ट हेल्थ मॉनिटरिंग उपकरणों का प्रत्यक्ष प्रदर्शन देखा। विशेषज्ञों द्वारा प्रस्तुत सत्रों में यह बताया गया कि भविष्य में एआई तकनीक किस प्रकार रोगों की शीघ्र पहचान, उपचार की सटीकता और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को बेहतर बनाएगी। इस शैक्षिक यात्रा में मेडिकल छात्र-छात्राओं को प्रो-वाइस चांसलर डॉ. गौरव सिंह का मार्गदर्शन मिला। उन्होंने छात्र-छात्राओं को चिकित्सा शिक्षा में तकनीकी नवाचारों को अपनाने, शोध गतिविधियों में भाग लेने तथा भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए तैयार रहने हेतु प्रेरित किया। उनके कुशल मार्गदर्शन से विद्यार्थियों को एआई और चिकित्सा के समन्वय की सम्भावनाओं को समझने का अवसर मिला।

एआई समिट में सहभागिता करने वाले मेडिकल छात्र-छात्राओं में डॉ. राहुल पटेल, डॉ. देवेश पंचोली, अनन्या सौरभ, रिद्धि शर्मा, राशि शर्मा तथा प्रियांशी चौहान शामिल रहे। विद्यार्थियों ने इस अनुभव को अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक बताया तथा कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक अवसर उन्हें आधुनिक चिकित्सा के बदलते परिदृश्य को समझने में सहायक होंगे। मेडिकल छात्र-छात्राओं ने बताया कि इस शैक्षिक भ्रमण में उन्होंने जाना कि एआई तकनीकें दक्षता बढ़ाने, चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंच में सुधार करने तथा देश के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने में निर्णायक हैं।

केडी विश्वविद्यालय के प्रो-चांसलर श्री मनोज अग्रवाल, कुलपति डॉ. मनेश लाहौरी, कुलसचिव डॉ. विकास कुमार अग्रवाल, केडी मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर के डीन और प्राचार्य डॉ. आर.के. अशोका ने एआई समिट से लौटे मेडिकल छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि भविष्य में भी ऐसे शैक्षणिक एवं तकनीकी आयोजनों में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने के प्रयास किए जाएंगे। कुलपति डॉ. लाहौरी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता स्वास्थ्य सेवा टीमों को रोगी के डेटा को डिजिटल रूप से संग्रहित करके और एक डिजिटल डेटाबेस बनाकर दस्तावेज़ीकरण में लगने वाले समय को कम करने में मदद करती है, जिसका उपयोग निदान, उपचार तथा नियमित चिकित्सा देखभाल के लिए किया जा सकता है। उन्होंने छात्र-छात्राओं का आह्वान किया कि चिकित्सा क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद लेने के साथ ही मानवीय पहलुओं पर भी गम्भीरता से ध्यान देना बहुत जरूरी है।

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