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मथुरा 10 फरवरी । कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) जो कभी एक चर्चित शब्द हुआ करती थी, अब हमारे जीवन का अभिन्न अंग बन चुकी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रौद्योगिकी के भविष्य को आकार दे रही है और उद्योगों में क्रांतिकारी बदलाव ला रही है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव बुद्धि का विकल्प नहीं है लेकिन यह मानव रचनात्मकता और प्रतिभा को बढ़ाने का एक नायाब उपकरण जरूर है। उक्त सारगर्भित उद्गार केडी विश्वविद्यालय द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रभाव विषय पर आयोजित सम्मेलन में अतिथि वक्ताओं ने व्यक्त किए। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रभाव विषय पर आयोजित सम्मेलन का शुभारम्भ कुलपति डॉ. मनेष लाहौरी, उप कुलपति डॉ. गौरव सिंह, प्राचार्य और डीन डॉ. आर.के. अशोका, कुल सचिव डॉ. विकास कुमार अग्रवाल आदि ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलित कर किया। अतिथि वक्ताओं डॉ. अमित कुमार सिंह और डॉ. रुचि सेहरावत का स्वागत कुल सचिव डॉ. विकास कुमार अग्रवाल तथा उप कुल सचिव हेमा जोशी ने किया।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रौद्योगिकी प्रभाव पर गुरु गोबिन्द सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के सूचना, संचार और प्रौद्योगिकी विभाग के प्रो. (डॉ.) अमित प्रकाश सिंह और असिस्टेंट प्रो. (डॉ.) रुचि सेहरावत ने विस्तार से प्रकाश डाला। प्रो. (डॉ.) अमित प्रकाश सिंह ने मेडिकल छात्र-छात्राओं को डेटा एनालिसिस, विजुअलाइजेशन और मशीन लर्निंग पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मेलन देश के एआई विजन को सशक्त बनाने के साथ स्वास्थ्य सेवा, कृषि, शिक्षा, कौशल विकास, भाषा प्रौद्योगिकी और सार्वजनिक सेवा वितरण जैसे क्षेत्रों में क्रांति लाने का काम कर सकते हैं।

अतिथि वक्ता प्रो. (डॉ.) रुचि सेहरावत ने हेल्थकेयर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला। प्रो. सेहरावत ने बताया कि एआई जटिल डेटा का विश्लेषण, सटीक निदान, व्यक्तिगत उपचार और प्रशासनिक कार्यों को ऑटोमेट कर चिकित्सा दक्षता को क्रांतिकारी बना रहा है। यह रेडियोलॉजी छवियों की त्वरित जांच, बीमारियों की भविष्यवाणी, आभासी सहायता और रोबोटिक सर्जरी में सहायता करता है, जिससे उपचार की सटीकता बढ़ती है और लागत में कमी आती है। उन्होंने कहा कि एआई एल्गोरिदम चिकित्सा छवियों (जैसे मैमोग्राम, सीटी स्कैन) का विश्लेषण करके ट्यूमर या कैंसर जैसी बीमारियों का प्रारम्भिक अवस्था में पता लगा सकते हैं, जिससे मानवीय त्रुटियों में कमी आती है।

कुलपति डॉ. मनेष लाहौरी ने अपने सम्बोधन में कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रभाव हर तरफ दिख रहा है लेकिन एआई से संचालित ज्ञान कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित न रहकर हर व्यक्ति, हर घर और हर उद्यम तक पहुंचना बहुत जरूरी है। डॉ. लाहौरी ने कहा कि एआई-संचालित विकास हर जिले और हर भाषा के लोगों के लिए हो। उन्होंने कहा कि एआई हमारे देश की प्रगति में अगला महत्वपूर्ण चरण है। एआई और मशीन लर्निंग के माध्यम से सार्वजनिक सेवाओं को तेज, अधिक पारदर्शी और अधिक नागरिक-केंद्रित बनाया जा सकता है।

डीन और प्राचार्य डॉ. आर.के. अशोका ने कहा कि एआई इम्पैक्ट सम्मिट केवल एक सम्मेलन नहीं है, यह एक ऐसा आंदोलन है जिसका उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता की शक्ति का उपयोग समाज के विकास, शैक्षणिक उत्कृष्टता और भविष्य के नवाचारों को सशक्त बनाने के लिए करना है। हमारी प्री–समिट गतिविधियों ने इस गति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ये गतिविधियां सहभागिता, सीखने और खोज के मंच के रूप में कार्य कर रही हैं, जिससे प्रतिभागियों को यह समझने में मदद मिल रही है कि एआई  किस प्रकार उद्योगों, अर्थव्यवस्था, शिक्षा और दैनिक जीवन को परिवर्तित कर रही है।

डॉ. अशोका ने कहा कि विशेषज्ञों के व्याख्यान, हैंड्स-ऑन कार्यशालाएं, पैनल चर्चाएं, जागरूकता अभियान, प्रोजेक्ट प्रदर्शनियां और इंटरैक्टिव लर्निंग मॉड्यूल छात्र-छात्राओं और पेशेवरों को मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, रोबोटिक्स, ऑटोमेशन, नैतिक एआई और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों की गहन समझ विकसित करने में मददगार साबित होते हैं। कुल सचिव डॉ. विकास कुमार अग्रवाल ने सभी का आभार मानते हुए सम्मेलन को उपयोगी बताया। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रभाव विषय पर आयोजित सम्मेलन में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. गगनदीप सिंह, डॉ. वीपी पांडेय आदि उपस्थित रहे।

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