
हाथरस 10 जनवरी । साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था ब्रज कला केंद्र, हाथरस शाखा द्वारा कार्यालय श्री राधा कृष्ण कृपा भवन, आगरा रोड पर विश्व हिंदी दिवस के पावन अवसर पर विचार एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के वरिष्ठ साथी पंडित अविनाश चंद्र पचौरी ने की, जबकि संचालन बीना गुप्ता एडवोकेट द्वारा किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ कवि दीपक रफी ने माँ शारदा एवं हिंदी की वंदना से किया। इसके पश्चात कवि रोशन लाल वर्मा ने अपने काव्य पाठ में कहा—
“हिंदी केवल शब्द नहीं, संस्कारों की पहचान है,
जन-जन की बोली बनकर यह भारत की शान है।”
वरिष्ठ कवि श्याम बाबू चिंतन ने काव्य पाठ करते हुए कहा—
“भावों को जो सरल बनाए, वही भाषा महान,
हिंदी से ही जीवित रहती भारत की पहचान।”
संस्था के उपाध्यक्ष एवं साहित्यकार गोपाल चतुर्वेदी ने कहा—
“हिंदी में ही है संवेदना, हिंदी में ही प्राण,
हिंदी बोले सत्य, अहिंसा, संस्कृति की जान।”
दोहा लेखक प्रभु दयाल प्रभु ने अपने दोहों के माध्यम से हिंदी की महत्ता बताते हुए कहा—
“सरल, मधुर, जन-जन की भाषा, हिंदी बने आधार,
ज्ञान, विवेक और प्रेम का, हिंदी करे विस्तार।”
कार्यक्रम के अंत में संस्था के अध्यक्ष चंद्रगुप्त विक्रमादित्य ने प्रेरणादायी काव्य पाठ करते हुए कहा—
“हिंदी केवल भाषा नहीं, यह आत्मा की आवाज़ है,
विश्व पटल पर भारत की यही सशक्त पहचान है।”
संस्था के उपाध्यक्ष पंडित जयशंकर पाराशर ने अपने उद्बोधन में हिंदी की महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा—
“हिंदी से ही जुड़ा समाज, हिंदी से संस्कार,
अपनी भाषा के सम्मान में ही राष्ट्र का विस्तार।”
कार्यक्रम के मध्य हिंदी की सेवा के लिए विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं के पदाधिकारियों द्वारा साहित्यकार चंद्रगुप्त विक्रमादित्य का अंगवस्त्र पहनाकर साहित्यकार गोपाल चतुर्वेदी ने सम्मान किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पंडित अविनाश चंद्र पचौरी ने सभी कवियों, साहित्यकारों एवं उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर हरिशंकर वर्मा, कपिल नरूला, संतोष उपाध्याय, पियूष अग्निहोत्री, भूरा पंडित, हबीब खान सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।




















