
हाथरस 03 अक्टूबर। 115वें लक्खी एवं तृतीय प्रांतीयकृत मेला श्री दाऊजी महाराज के पंडाल में आयोजित ‘एक शाम शहीदों के नाम’ कार्यक्रम में देश के क्रांतिकारियों और शहीद सैनिकों की शहादत को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम में कवियों ने अपनी ओजपूर्ण रचनाओं के माध्यम से वीरों की गौरवगाथा प्रस्तुत की, वहीं स्कूली बच्चों ने देशभक्ति से ओतप्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। कार्यक्रम में वरिष्ठ भाजपा नेता रामेश्वर उपाध्याय ने कहा कि उन्हें ‘एक शाम शहीदों के नाम’ कार्यक्रम में आमंत्रित कर जो सम्मान आयोजक मंडल ने दिया है, उसके लिए वह आभारी हैं। नगरपालिका अध्यक्ष श्वेता दिवाकर ने कहा कि दाऊजी मेले का मुख्य आधार यदि ‘एक शाम शहीदों के नाम’ को कहा जाए तो गलत नहीं होगा। उन्होंने कहा कि आज मेले में जो रौनक दिखाई देती है, उसके पीछे उन क्रांतिकारियों का संघर्ष और शहीद सैनिकों का बलिदान है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ प्रथम आराध्य भगवान गणेश की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। दीप प्रज्ज्वलन में वरिष्ठ भाजपा नेता राजेश सिंह गुड्डू, पूर्व चेयरमैन डौली माहौर, वरिष्ठ अधिवक्ता बासुदेव माहौर और विंग कमांडर दर्शना सोनकर सहित अन्य अतिथि शामिल रहे। कार्यक्रम में शहीदों एवं क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके संघर्ष और बलिदान को याद किया गया।
पूर्व चेयरमैन डौली माहौर ने अपने संबोधन में कहा कि शहीदों की शहादत और क्रांतिकारियों का संघर्ष ही हमारी आजाद फिजा का प्रतीक है। उन्होंने नई पीढ़ी से देश के लिए बलिदान देने वाले वीरों के जीवन और संघर्ष से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। अन्य वक्ताओं ने भी कार्यक्रम के संयोजक युवा कवि नैतिक दीक्षित के प्रयासों की सराहना की। कार्यक्रम में राणा मुनि प्रताप, डॉ. शिवम आजाद, मनोज चौहान, मनु दीक्षित, अंशु छौंकर, अशोक अग्निवीर सहित अन्य स्थानीय एवं आमंत्रित कवियों ने काव्यपाठ किया। वीर रस और देशभक्ति से ओतप्रोत रचनाओं के माध्यम से कवियों ने शहीदों के त्याग, बलिदान और राष्ट्रप्रेम को शब्दों में पिरोया। कविताओं के दौरान पंडाल देशभक्ति के भाव से गूंजता रहा। ‘एक शाम शहीदों के नाम’ और ‘मेरी माटी मेरा देश’ कार्यक्रमों ने मिलकर उपस्थित लोगों के बीच देशभक्ति का संदेश दिया। कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में वरिष्ठ कवयित्री मनु दीक्षित, रूपम कुशवाहा, सुनील दीक्षित और प्रशांत दीक्षित सहित अन्य लोगों का सहयोग रहा। कार्यक्रम की अध्यक्षता सखी सीमा अग्रवाल ने की, जबकि संचालन आशु कवि अनिल बौहरे एवं चंद्रगुप्त विक्रमादित्य ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।





