अनियंत्रित पुलिस वाहन रेलवे बैरियर से टकराया, आरपीएफ ने किया जब्त
हाथरस 10 जनवरी । शहर के बागला कॉलेज रोड पर आज सुबह एक पुलिस वाहन अनियंत्रित होकर रेलवे बैरियर से टकरा गया। हादसा सुबह करीब 4:30 बजे हुआ, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई और कुछ समय के लिए सड़क पर जाम की स्थिति बन गई। हालांकि, उस समय यातायात
विद्यापीठ इंटर कॉलेज में दीपोत्सव का भव्य आयोजन, रंगोली और दीपों से सजाया कॉलेज परिसर
सासनी 18 अक्टूबर । विद्यापीठ इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य डॉ. राजीव कुमार के निर्देशन में आज पांच दिवसीय दीपोत्सव पर्व के अवसर पर विद्यालय परिसर को रंगोली और दीपों से सजाया गया। कार्यक्रम में छात्राओं ने अरुणाचल प्रदेश और मेघालय की पारंपरिक संस्कृति के अनुसार भोजन तैयार किया, जिसे भारत
जीएल बजाज के ‘दिवाली हाट’ में दिखी सांस्कृतिक विरासत, छात्र-छात्राओं ने रंगीला राजस्थान की प्रस्तुति से लूटी महफिल
मथुरा 18 अक्टूबर । जी.एल. बजाज ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, मथुरा के प्रबंधन अध्ययन विभाग और ई-सेल द्वारा “दिवाली हाट 2025” का आयोजन किया गया जिसमें छात्र-छात्राओं ने उत्साह और उमंग के बीच दीपावली के आध्यात्मिक संदेश “अंधकार पर प्रकाश, असत्य पर सत्य और अज्ञान पर ज्ञान की विजय” को सजीव रूप में प्रस्तुत कर सभी की वाहवाही
हाथरस से जाने वाली बसों का टाइम टेबल
हाथरस से जाने वाली बसों का टाइम टेबल कहाँ से – कहाँ तक वाया टाइम हाथरस से नोएडा यमुना एक्सप्रेससवे 5:30, 6:00, 6:30, 7:00 हाथरस से नोएडा यमुना एक्सप्रेससवे 12:30, 13:00, 16:00 हाथरस से दिल्ली अलीगढ, खुर्जा 4:30, 5:00. 5:30, 6:00. 8:00 बल्लभगढ़ इगलास, गौड़ा 6:00, 6:30
सुरजीत मान जलईया सिंह की नई रचना ” प्रधान ”
पीठ पीछे जानता है क्या क्या कहते लोग हैं? सामने आता नहीं है कोई भी रघुराज के। जीतकर आया प्रधानी रोब थानेदार का। रोज दुगना बढ़ रहा है कद भी अब किरदार का। छटपटाती है खजूरी बोलती कुछ भी नहीं जैसे पंजों में फंसी हो एक चिड़िया बाज़ के। सामने
अवशेष मानवतावादी का गीत – फिर भी ईश्वर के होने का होता है अहसास
ना तो कोई भी सबूत है ना गवाह है पास। फिर ईश्वर भी के होने का होता है अहसास।। तोड़ तोड़कर कण को हमने कण कण में तोड़ा। फिर कण के टूटे कण कण को आपस में जोड़ा।। तत्व तत्व में छिपे तत्व का सारा तत्व निकाला, धरती क्या अम्बर
शिव कुमार ‘दीपक’ की बाल रचना
झूला लेकर आया सावन । हरियाली ले वर्षा आयी । बच्चों ने ली मन अंगड़ाई ।। दादुर पपिहा नाचे मोर । काली कोयल करे कनकोर ।। धानी चूँदर ओढ़े धरती । रिमझिम रिमझिम बरसा बरसी । छुक – छुक बच्चे रेल चलाते । हँसते गाते खूब नहाते ।। नदिया पोखर
अकबर सिंह अकेला की एक कविता –
वर्षा झमझम हो रही, मौसम भी परवान। हवा निराली चल रही, पंछी गाउत गान।। दिन में अँधियारी झुकी, बिल्कुल रात समान। लुका छिपी बदरा करें, सूरज अंतर ध्यान।। सांय काल में लग रहा, कबहुं न बरसो नीर | धूप खिली राहत मिली, बदलो रुखहिं समीर || अकबर सिंह अकेला मानिकपुर,
यशोधरा यादव ‘यशो’का एक नवगीत
लेखनी कुछ गीत लिख दुःखित जन को प्रीति लिख . कामनाओं की लता जब पुष्प से सज्जित हुई यंत्रवत कर्मों से हटकर प्रीति प्रतिबिम्बत हुई छंद के स्वर्णिम सवेरों की नयी रणनीति लिख लेखनी………… सूखते संबंध की टहनी पर कलियां खिल उठें बैठे जो अनजान बन मन मीत बन मिल
कु० राखी सिंह शब्दिता की गजल
ग़ज़ल तुमको भी मुहब्बत है बता क्यूं नहीं देते । रस्मों को वफ़ाओं की निभा क्यूं नहीं देते ।। हंसकर के मुझे देते हैं वो दर्दे- जुदाई ; ज़ख्मों की मगर मुझको दवा क्यूं नहीं देते ।। आँखों में कहीं दर्द समन्दर सा है गहरा ; जी भर के मुझे


























