
हाथरस 04 नवंबर। कोतवाली हाथरस गेट क्षेत्र के कृष्णा नगर में मारपीट और जातिसूचक शब्द कहने के आरोपों से जुड़े मामले में विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट की अदालत ने चार आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने दोनों पक्षों की बहस और पत्रावली का अवलोकन करने के बाद पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा। वहीं, सुनवाई के दौरान वादी के अपने पूर्व बयानों से मुकरने पर न्यायालय ने उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए नोटिस जारी करने का आदेश दिया। मामला थाना हाथरस गेट क्षेत्र के कृष्णा नगर का है। वादी अजय कुमार ने पुलिस को दी तहरीर में आरोप लगाया था कि 27 फरवरी 2024 की शाम करीब छह बजे वह दुर्गेश वाटिका के पास खड़ा था। आरोप के मुताबिक, वहां मौजूद विनय वर्मा ने उसके साथ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया। विरोध करने पर विनय ने अपने भाइयों और साथियों को बुला लिया तथा उसके साथ मारपीट की।
इस मामले में पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 452, 323, 504, 506 तथा एससी/एसटी एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। विवेचना पूरी करने के बाद चार आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। विशेष सत्र परीक्षण के दौरान अदालत में वादी अजय कुमार ने अपने मुख्य बयान में कहा कि अज्ञात लोगों ने उसके साथ मारपीट की थी। उसने यह भी कहा कि तहरीर पर बिना पढ़े ही हस्ताक्षर कर दिए थे। इस प्रकार वादी अपने पूर्व आरोपों के समर्थन में बयान देने से मुकर गया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अभियोजन पक्ष को आरोप साबित करने में असफल माना। इसके चलते चारों आरोपियों को बरी कर दिया गया। साथ ही वादी के खिलाफ कार्रवाई के संबंध में नोटिस जारी करने का आदेश दिया गया।





