
हाथरस 05 नवंबर। कार्तिक मास के पावन अवसर पर मनाए जाने वाले पांच दिवसीय शरद सनातनी उत्सव को लेकर श्री वेद भगवान सनातन धर्म सभा के अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र स्वरूप शर्मा ने सनातन धर्मावलंबियों की जानकारी के लिए धनतेरस, छोटी दिवाली, दीपावली सहित विभिन्न पर्वों की तिथियों एवं पूजन-अर्चन के शुभ मुहूर्त की जानकारी दी है। डॉ. जितेंद्र स्वरूप शर्मा ने बताया कि कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर 2026 को सुबह 10:30 बजे से प्रारंभ होकर 7 नवंबर को सुबह 10:45 बजे तक रहेगी। प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि व्याप्त होने के कारण धनतेरस का पर्व 6 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन पूजन का श्रेष्ठ मुहूर्त शाम 6:02 बजे से रात 7:57 बजे तक रहेगा। वहीं यम दीपदान के लिए शाम 5:33 बजे से रात 8:09 बजे तक का समय शुभ बताया गया है। इस दौरान घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके दीपक जलाने की परंपरा है। उन्होंने बताया कि छोटी दिवाली अर्थात नरक चतुर्दशी का पर्व 7 नवंबर 2026, शनिवार को मनाया जाएगा। चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर को सुबह 10:49 बजे से प्रारंभ होकर 8 नवंबर को सुबह 11:29 बजे तक रहेगी। इस दिन अभ्यंग स्नान यानी तेल लगाकर स्नान करने का शुभ समय सुबह 5:34 बजे से 6:40 बजे तक रहेगा। वहीं प्रदोष काल में यम दीपदान का श्रेष्ठ समय शाम 5:32 बजे से 7:56 बजे तक निर्धारित बताया गया है।
दीपावली के संबंध में उन्होंने बताया कि कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 8 नवंबर 2026 को सुबह 11:27 बजे से प्रारंभ होकर 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे तक रहेगी। 8 नवंबर की रात्रि में अमावस्या तिथि और प्रदोष काल का संयोग होने के कारण दीपावली का पर्व इसी दिन मनाना शास्त्र सम्मत है। इस दिन रात्रि में मां महालक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर देव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा एवं विधि-विधान से पूजन करने से घर में सुख-समृद्धि, शांति और धन-धान्य का आगमन होता है। डॉ. शर्मा ने बताया कि दीपावली पर मां लक्ष्मी एवं भगवान गणेश के पूजन का श्रेष्ठ मुहूर्त शाम 5:54 बजे से रात 7:50 बजे तक रहेगा। इसकी कुल अवधि 1 घंटा 56 मिनट है। इस दौरान वृषभ लग्न रहेगा, जिसे धन-समृद्धि और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने की दृष्टि से विशेष शुभ माना जाता है। वहीं निशीथ काल में रात्रि पूजा एवं विशेष पूजन का समय रात 11:39 बजे से 9 नवंबर की रात 12:31 बजे तक रहेगा। उन्होंने कहा कि दीपावली के दिन घरों को दीपकों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाकर मां लक्ष्मी एवं भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित करनी चाहिए। कलश स्थापना के साथ विधि-विधान से पूजन, मंत्र जाप और आरती-वंदन करना चाहिए। पूजन के पश्चात घर के प्रत्येक कोने, मुख्य द्वार तथा तुलसी के पास दीपक जलाने चाहिए। इससे घर में सकारात्मकता और उल्लास का वातावरण बनता है। अंत में डॉ. जितेंद्र स्वरूप शर्मा ने सभी सनातन धर्मावलंबियों को पांच दिवसीय शरद सनातनी उत्सव एवं दीपावली की अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए सभी से पर्वों को श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ मनाने का आह्वान किया। उन्होंने यह जानकारी श्री वेद भगवान सनातन धर्म सभा (रजिस्टर्ड), हाथरस की ओर से साझा की।






