
हाथरस 28 अक्टूबर। करवा चौथ के पर्व पर इस वर्ष भद्रा का कोई प्रभाव नहीं रहेगा। यह जानकारी श्री वेद भगवान सनातन धर्म सभा के अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र स्वरूप शर्मा ने दी। उन्होंने बताया कि पंचांग के अनुसार, करवा चौथ के दिन भद्रा काल सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगा। ऐसे में शाम के समय होने वाली व्रत पूजा पर भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। डॉ. शर्मा ने बताया कि भद्रा काल 28 अक्टूबर 2026 को सुबह 5:31 बजे प्रारंभ होकर 29 अक्टूबर को सुबह 4:27 बजे समाप्त होगा। धर्मसिंधु और निर्णयसिंधु जैसे धर्मशास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार, भद्रा का विचार उसकी सक्रिय अवधि के दौरान किया जाता है। भद्रा काल समाप्त होने के बाद उसका दोष प्रभावी नहीं रहता।
उन्होंने बताया कि करवा चौथ और संकष्टी चतुर्थी जैसे व्रतों की पूजा के संदर्भ में भद्रा का विचार विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों से अलग होता है। धर्मशास्त्रों में भद्रा के निवास स्थान का भी विचार किया गया है। मान्यता के अनुसार, स्वर्ग या पाताल लोक में स्थित भद्रा का पृथ्वी लोक पर अशुभ प्रभाव नहीं माना जाता, जबकि मृत्यु लोक की भद्रा को विशेष रूप से विचारणीय माना गया है। डॉ. शर्मा ने कहा कि 29 अक्टूबर को करवा चौथ का पर्व मनाने में भद्रा को लेकर किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने श्रद्धालुओं से पंचांग के अनुसार विधि-विधान से पर्व मनाने की अपील की।










