अलीगढ़ 27 अक्टूबर। मंगलायतन विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय अंतर-विभागीय सांस्कृतिक महोत्सव अथर्व 2026-27 की धूम मची हुई है। सुर, ताल, नृत्य और अभिनय से सजे इस महोत्सव में विद्यार्थियों की प्रतिभा, रचनात्मकता और आत्मविश्वास का शानदार संगम देखने को मिल रहा है। मंच पर प्रस्तुतियों के दौरान कहीं सुरीले स्वरों की गूंज सुनाई दे रही है तो कहीं नृत्य की थिरकन और अभिनय की भावपूर्ण अभिव्यक्ति दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर रही है। इस महोत्सव का उद्देश्य विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा निखारने, मंच पर स्वयं को अभिव्यक्त करने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करना है।
महोत्सव के अंतर्गत शास्त्रीय, सुगम और समूह गायन, वादन, शास्त्रीय एवं लोकनृत्य, वेस्टर्न डांस तथा थिएटर की विभिन्न विधाओं में प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं। एकांकी, मूक अभिनय और कहानी वाचन जैसी प्रस्तुतियों के माध्यम से विद्यार्थी अपनी कला और कल्पनाशीलता का प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रतिभागियों का उत्साह और उनकी प्रस्तुतियों के प्रति दर्शकों की सराहना आयोजन को यादगार बना रही है। प्रतिस्पर्धा को रोचक बनाने और विद्यार्थियों में टीम भावना विकसित करने के लिए विभिन्न संकायों को तावी, व्यास, भागीरथी, झेलम, तुंगभद्रा, दामोदर, रावी और अलकनंदा जैसी नदियों के नाम पर बनी टीमों में विभाजित किया गया है। महोत्सव का समापन समारोह 28 अक्टूबर को होगा। इसमें विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को ट्रॉफी, पदक और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।
कुलपति प्रो. पी.के. दशोरा ने कहा कि सांस्कृतिक गतिविधियां विद्यार्थियों के व्यक्तित्व को निखारने और उनमें आत्मविश्वास, अनुशासन, रचनात्मकता तथा सामूहिक सहभागिता की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए सक्षम बनाना भी है। कुलसचिव कमांडर मनोज के., परीक्षा नियंत्रक प्रो. दिनेश शर्मा और डीन अकादमिक प्रो. अम्बरीष शर्मा ने भी महोत्सव के आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की शानदार प्रस्तुतियां उनकी मेहनत, लगन और प्रतिभा को दर्शाती हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। आयोजन छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. प्रमोद कुमार, संयोजक प्रो. देबाशीष चक्रवर्ती, सह-संयोजक डा. पूनम रानी, डा. नियति शर्मा, भावना राज, अर्शिल नूर, डा. मनीषा उपाध्याय, डा. कविता शर्मा व विकास पाल्के के मार्गदर्शन में किया जा रहा है।









