मथुरा 27 अक्टूबर। संस्कृति विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के दिशा-निर्देशों के तहत ‘निवारक सतर्कता अभियान-2026’ की शुरुआत की गई है। अभियान का उद्देश्य विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और कार्यकुशलता को बढ़ावा देना है। इसके तहत लंबित शिकायतों के निस्तारण, कानूनी मामलों के समयबद्ध समाधान और संविदा प्रबंधन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। विश्वविद्यालय के असिस्टेंट रजिस्ट्रार मनीष जी ने बताया कि विद्यार्थियों, कर्मचारियों और अन्य हितधारकों की शिकायतों के प्रभावी एवं समयबद्ध निस्तारण के लिए शिकायत निवारण प्रणाली लागू की गई है। इसके अंतर्गत सभी शिकायतों का विधिवत पंजीकरण किया जाएगा और निष्पक्षता एवं गोपनीयता के साथ उनकी जांच सुनिश्चित की जाएगी।
उन्होंने बताया कि न्यायालयों और वैधानिक प्राधिकरणों के समक्ष लंबित कानूनी मामलों की नियमित समीक्षा के लिए विशेष विधि प्रकोष्ठ (लीगल सेल) को सक्रिय किया गया है। इसका उद्देश्य मामलों में आवश्यक कार्रवाई समय-सीमा के भीतर पूरी करना और कानूनी प्रक्रियाओं को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाना है। अभियान के तहत संविदा प्रबंधन को भी अधिक पारदर्शी बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है। खरीद प्रक्रियाओं, निविदा आमंत्रण और विक्रेताओं के चयन में निष्पक्षता बरतने के साथ वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित किया जाएगा। सामान एवं सेवाओं की समय पर आपूर्ति और निर्धारित नियमों के सत्यापन के बाद ही भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
अभियान की प्रगति की निगरानी के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्णय लिया गया है। नोडल अधिकारी विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित करेंगे और सुधारात्मक कार्यों की प्रगति रिपोर्ट सक्षम प्राधिकारियों को सौंपेंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, इन प्रयासों से प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक संवेदनशील, कुशल और जवाबदेह बनाने में मदद मिलेगी। कार्यक्रम में संस्कृति स्कूल ऑफ कॉमर्स एंड बिजनेस मैनेजमेंट के डीन डॉ. गंगाधर हुगर भी मौजूद रहे।









