
हाथरस 21 अक्टूबर । अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों के तहत मतदाता सूची को दुरुस्त करने के लिए विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) कराया जाएगा। इस प्रक्रिया के दौरान निर्वाचन कार्य से जुड़े अधिकारियों के तबादलों पर रोक रहेगी। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार, 12 नवंबर को मतदाता सूची का प्रारूप प्रकाशित होने से लेकर अगले वर्ष 4 जनवरी को अंतिम मतदाता सूची जारी होने तक संबंधित अधिकारियों को आयोग की अनुमति के बिना नहीं हटाया जा सकेगा। इस अवधि में जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी, तहसीलदार सहित निर्वाचन कार्य से जुड़े अधिकारियों के तबादले करने से पहले आयोग की मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बुधवार को बताया कि आगामी एक जनवरी को अर्हता तिथि मानकर मतदाता सूची का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कराया जाएगा। इस दौरान जिला निर्वाचन अधिकारी, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ), सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (एईआरओ) सहित पुनरीक्षण कार्य से जुड़े सभी अधिकारियों के पद खाली नहीं रखे जाएंगे। आयोग ने यह व्यवस्था इसलिए की है, ताकि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और विवरणों में संशोधन की प्रक्रिया प्रभावित न हो।
निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, 12 नवंबर को मतदाता सूची का प्रारूप प्रकाशित किया जाएगा। इसके बाद 11 दिसंबर तक मतदाता अपने नाम, पते और अन्य विवरणों में त्रुटियों को ठीक कराने के लिए दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे। एक जनवरी को 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवा भी मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकेंगे। दावे और आपत्तियों का निस्तारण 28 दिसंबर तक किया जाएगा। इसके बाद 4 जनवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान निर्वाचन से जुड़े अधिकारियों की तैनाती और कार्यों में निरंतरता बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत आयोग का निर्देश मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13सीसी के तहत मतदाता सूची तैयार करने और उसमें संशोधन से जुड़े अधिकारी निर्वाचन आयोग के नियंत्रण, निगरानी और अनुशासन के अधीन कार्य करते हैं। इसी प्रावधान के तहत आयोग ने पुनरीक्षण प्रक्रिया पूरी होने तक संबंधित अधिकारियों के तबादलों से पहले अनुमति लेने के निर्देश दिए हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करना और यह सुनिश्चित करना है कि पात्र मतदाताओं के नाम सूची में शामिल हों तथा मतदाता अपने विवरणों में जरूरी संशोधन करा सकें।









