
हाथरस 19 अक्टूबर । हाथरस से मथुरा और सिकंदराराऊ जाने वाले यात्रियों को शाम पांच बजे के बाद रोडवेज बसों की कमी के चलते परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हाथरस डिपो की बसों का नियमित संचालन शाम के बाद नहीं होने से यात्रियों को दूसरी बसों का लंबा इंतजार करना पड़ता है। कई बार एक घंटे तक बस नहीं मिलने के कारण यात्रियों को निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता है।
दिन के समय हाथरस से मथुरा और सिकंदराराऊ के लिए रोडवेज बसें आसानी से मिल जाती हैं, लेकिन शाम करीब पांच बजे के बाद स्थिति बदल जाती है। हाथरस डिपो की बसें रवाना होने के बाद यात्रियों को दूसरे डिपो की बसों के आने का इंतजार करना पड़ता है। इससे नौकरी, कारोबार और अन्य जरूरी कामों से यात्रा करने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। मुरसान, सोनाई, राया, रति का नगला और बस्तोई समेत रास्ते में पड़ने वाले कस्बों और गांवों के यात्रियों को भी शाम के समय आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
बसों का इंतजार या निजी वाहनों का सहारा, यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें
शाम के समय दो पैसेंजर ट्रेनों का विकल्प जरूर उपलब्ध है, लेकिन ट्रेनों का समय सभी यात्रियों के लिए सुविधाजनक नहीं है। ऐसे में ट्रेन छूट जाने पर लोगों को रोडवेज बसों का इंतजार करना पड़ता है या निजी वाहनों से अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ता है। नाई का नगला निवासी पवन कुमार का कहना है कि रात के समय सिकंदराराऊ जाने के लिए रोडवेज बस नहीं मिलती, जिसके चलते यात्रियों को मजबूरी में निजी वाहनों से यात्रा करनी पड़ती है। वहीं, वाटर वर्क्स निवासी राकेश कुमार ने बताया कि मथुरा जाने के लिए उन्हें ट्रेन के समय पर निर्भर रहना पड़ता है। यदि ट्रेन छूट जाए तो बस मिलने में काफी परेशानी होती है।
कम सवारियों के कारण शाम को कम चलती हैं बसें
इस संबंध में रोडवेज डिपो के अधिकारी ने बताया कि शाम के समय मथुरा और सिकंदराराऊ मार्ग पर सवारियों की संख्या कम रहती है। इसके चलते बसों का संचालन करने में डिपो को आर्थिक नुकसान होता है। फिलहाल शाम के समय कुछ छोटी बसें चलाने का प्रयास किया जा रहा है। पर्याप्त संख्या में सवारियां मिलने पर बसों की संख्या बढ़ाने के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा।
मथुरा और सिकंदराराऊ रूट पर नियमित बस सेवा की दरकार
यात्रियों की परेशानी को देखते हुए शाम के समय मथुरा और सिकंदराराऊ मार्ग पर नियमित बस संचालन की जरूरत महसूस की जा रही है। बसों की पर्याप्त उपलब्धता होने से यात्रियों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा और उन्हें निजी वाहनों पर निर्भर नहीं रहना होगा। खासकर रास्ते में पड़ने वाले कस्बों और गांवों के लोगों को इससे राहत मिल सकती है।







