
हाथरस 19 अक्टूबर। महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से हाथरस पुलिस द्वारा मिशन शक्ति फेज-6.0 के अंतर्गत जनपदभर में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस अधीक्षक चिरंजीव नाथ सिन्हा के निर्देशन में विभिन्न थाना क्षेत्रों में क्षेत्राधिकारियों, थाना प्रभारियों और मिशन शक्ति टीमों ने मंदिरों सहित अन्य सार्वजनिक स्थलों पर पहुंचकर महिलाओं एवं बालिकाओं को उनके अधिकारों और सुरक्षा के प्रति जागरूक किया। अभियान के दौरान पुलिस टीमों ने महिलाओं एवं बालिकाओं को महिला संबंधी अपराधों से बचाव, कानूनी अधिकारों और किसी भी प्रकार की समस्या या उत्पीड़न की स्थिति में पुलिस से सहायता प्राप्त करने के बारे में विस्तार से जानकारी दी। साथ ही उन्हें जागरूक किया गया कि किसी भी आपातकालीन परिस्थिति में बिना संकोच पुलिस की मदद लें और अपने साथ होने वाले अपराध या उत्पीड़न के विरुद्ध आवाज उठाएं। पुलिस टीमों ने महिलाओं को अपनी सुरक्षा के प्रति सजग रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी संबंधित पुलिस को देने के लिए भी प्रेरित किया।
जागरूकता अभियान के दौरान महिला हेल्पलाइन नंबर 1090, आपातकालीन पुलिस सेवा 112, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 के बारे में जानकारी दी गई। पुलिस टीमों ने बताया कि आवश्यकता पड़ने पर इन हेल्पलाइन सेवाओं के माध्यम से सहायता प्राप्त की जा सकती है। इसके अलावा महिलाओं एवं बालिकाओं को साइबर अपराधों से बचाव, सोशल मीडिया का सुरक्षित उपयोग और ऑनलाइन धोखाधड़ी के प्रति सतर्क रहने के लिए जागरूक किया गया। मिशन शक्ति टीमों ने बालिकाओं को शिक्षा के प्रति जागरूक रहने, आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने और अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने के लिए प्रेरित किया। वहीं, महिलाओं को शासन द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं और सहायता सेवाओं की जानकारी देते हुए सुरक्षित एवं सम्मानजनक वातावरण बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश दिया गया। हाथरस पुलिस द्वारा मिशन शक्ति फेज-6.0 के अंतर्गत महिलाओं एवं बालिकाओं में सुरक्षा की भावना मजबूत करने, उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न थाना क्षेत्रों में लगातार अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस का उद्देश्य महिलाओं एवं बालिकाओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के साथ उन्हें किसी भी प्रकार के उत्पीड़न के खिलाफ निर्भीक होकर आवाज उठाने के लिए प्रोत्साहित करना है।










