अलीगढ़ 27 सितम्बर। नौरंगाबाद स्थित मां बगलामुखी मंदिर, बी. दास कम्पाउंड में शनिवार को सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा एवं महारुद्र महायज्ञ का विधिवत शुभारंभ हुआ। धार्मिक आयोजन के प्रथम दिन सुबह मंदिर परिसर से भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं, युवाओं और श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सिर पर कलश धारण किए महिलाओं की लंबी कतार और भगवा वस्त्रों में शामिल युवाओं ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कलश यात्रा मंदिर परिसर से प्रारंभ होकर क्षेत्र के प्रमुख मार्गों से होती हुई वापस मंदिर परिसर पहुंची, जहां धार्मिक विधि-विधान के साथ यात्रा का समापन किया गया। मार्ग में जगह-जगह स्थानीय लोगों द्वारा पुष्पवर्षा कर कलश यात्रा का स्वागत किया गया। कलश यात्रा का नेतृत्व पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी की महामंडलेश्वर डॉ. अन्नपूर्णा भारती पुरी (डॉ. पूजा शकुन पांडे) ने किया। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं में खासा उत्साह दिखाई दिया। भक्ति गीतों और धार्मिक जयघोष के बीच निकली कलश यात्रा से क्षेत्र का माहौल आध्यात्मिक और भक्तिमय नजर आया। आयोजन स्थल पर सुबह हवन-पूजन भी किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धार्मिक अनुष्ठान में सहभागिता की।
शाम चार बजे श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। कथा व्यास पं. अशोक कुमार पांडेय जी ने प्रथम दिन श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत के महत्व से परिचित कराया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कई कथावाचक धार्मिक कथाओं को केवल कहानी के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं, जबकि प्रत्येक कथा के पीछे गहरा आध्यात्मिक और जीवनोपयोगी संदेश छिपा होता है। आवश्यकता इस बात की है कि कथा के मूल भाव और उसके संदेश को समझा जाए तथा उसे जीवन में उतारने का प्रयास किया जाए। उन्होंने कहा कि भागवत कथा का श्रवण करते समय श्रीमद्भगवद्गीता के यथार्थ स्वरूप और उसके संदेश को भी ध्यान में रखना आवश्यक है, तभी समाज और विशेष रूप से युवा पीढ़ी तक धर्म और जीवन मूल्यों का सही संदेश पहुंचाया जा सकता है। कथा व्यास ने श्रद्धालुओं से कहा कि धार्मिक कथा को केवल सुन लेना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके विषय में मनन और चिंतन करना भी आवश्यक है। कथा के माध्यम से मिलने वाले संदेशों को अपने व्यवहार और जीवन में अपनाने का प्रयास किया जाए, तभी कथा श्रवण का वास्तविक उद्देश्य पूरा हो सकता है। उनके प्रवचन के दौरान श्रद्धालु पूरे ध्यान और श्रद्धा के साथ कथा सुनते नजर आए।
श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिन जर्मनी से आईं योगिनी मेखला भी कार्यक्रम में मौजूद रहीं। उनके अलावा मंदिर परिसर में आयोजित हवन-पूजन में भी श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। कथा के उपरांत आयोजन समिति की ओर से सभी श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद एवं भोजन की व्यवस्था की गई। धार्मिक आयोजन को लेकर मंदिर परिसर में दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। महामंडलेश्वर डॉ. अन्नपूर्णा भारती पुरी जी ने बताया कि सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा एवं महारुद्र महायज्ञ का आयोजन 4 अक्टूबर तक चलेगा। आयोजन के दौरान प्रतिदिन सुबह 8 बजे हवन किया जाएगा, जबकि शाम 4 बजे से 7 बजे तक श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन होगा। उन्होंने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में कार्यक्रम में पहुंचकर कथा श्रवण और धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागी बनने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि 4 अक्टूबर को धार्मिक अनुष्ठानों की पूर्णाहुति के साथ विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद की व्यवस्था रहेगी। आयोजन को लेकर मंदिर परिसर में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और आने वाले दिनों में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।








