
हाथरस 12 सितम्बर। आत्महत्या निषेध माह के अंतर्गत अलीगढ़ रोड स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के आनंदपुरी कॉलोनी केंद्र की ओर से इंस्टिट्यूट ऑफ नर्सिंग एंड पैरामेडिकल साइंसेज, सासनी में ‘आत्महत्या नहीं, राहें और भी बहुत हैं’ विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों और शिक्षकों को जीवन की चुनौतियों का सामना सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास के साथ करने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने ‘कौन कहता है आसमान में छेद नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों’ जैसे प्रेरणादायी संदेशों के माध्यम से युवाओं में उत्साह और संघर्ष करने की भावना जगाई।
विपरीत परिस्थितियों में सकारात्मक सोच जरूरी
आनंदपुरी कॉलोनी केंद्र की प्रभारी बीके शांता बहन ने कहा कि जीवन को देखने का नजरिया हर व्यक्ति का अलग होता है। किसी के लिए जीवन संघर्ष है तो किसी के लिए संगीत, कोई जीवन को कष्ट के रूप में देखता है तो कोई उसी जीवन में आनंद महसूस करता है। उन्होंने कहा कि जीवन में सुख और दुख दोनों आते हैं। जब हम सुख को स्वीकार करते हैं तो दुख को भी स्वीकार करना चाहिए। दुखी होकर जीवन समाप्त करना किसी समस्या का समाधान नहीं है। उन्होंने युवाओं से निराशा के समय आत्मघाती कदम उठाने के बजाय परिस्थितियों का डटकर सामना करने का आह्वान किया।
महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेने की अपील
बीके दिनेश भाई ने स्वामी विवेकानंद, अरुणिमा सिन्हा, पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, अब्राहम लिंकन, कपिल शर्मा और आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री सहित विभिन्न प्रेरणादायी व्यक्तित्वों के उदाहरण देते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियां आने पर कुछ लोग टूट जाते हैं, जबकि कुछ लोग उन्हीं परिस्थितियों को अपनी सफलता की सीढ़ी बना लेते हैं। उन्होंने कहा कि महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेते हुए हमें जीवन को खत्म करने के बजाय उन परिस्थितियों और समस्याओं को खत्म करने का लक्ष्य बनाना चाहिए, जिनसे हम परेशान हैं। कार्यक्रम में बीके गजेंद्र भाई ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर इंस्टिट्यूट ऑफ नर्सिंग एंड पैरामेडिकल साइंसेज के प्रधानाचार्य एलएन शर्मा सहित संस्थान के सभी शिक्षक मौजूद रहे। कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं को यह संदेश दिया गया कि जीवन में कितनी भी कठिन परिस्थितियां क्यों न आएं, निराश होकर आत्महत्या का रास्ता चुनने के बजाय मदद, संवाद, सकारात्मक सोच और संघर्ष के माध्यम से आगे बढ़ने के रास्ते हमेशा मौजूद हैं।






