
हाथरस 06 सितम्बर। गौ मांस के आरोपों को लेकर हिंदूवादी संगठनों और पुलिस के बीच शुरू हुआ विवाद फिलहाल थमता नजर आ रहा है। शनिवार को विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और गौ रक्षकों ने थाना हाथरस गेट प्रभारी नितिन कसाना पर गंभीर आरोप लगाते हुए एसपी कार्यालय पर धरना शुरू कर दिया था। प्रदर्शनकारी थाना प्रभारी को हटाने की मांग पर अड़े रहे। हिंदूवादी संगठनों का आरोप था कि मांस तस्करों के समर्थन में पुलिस ने उनके नेताओं और कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज किया। इसी मामले को लेकर विहिप और बजरंग दल के पदाधिकारियों की थाना प्रभारी नितिन कसाना से तीखी नोकझोंक भी हुई थी। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि बातचीत के दौरान थाना प्रभारी ने हिंदूवादी नेताओं को कथित तौर पर ‘दलाल’ कहा और उन पर चौथ लेने जैसे गंभीर आरोप लगाए। साथ ही धमकी देने का भी आरोप प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाया गया। मामला बढ़ने के बाद शनिवार देर रात करीब 11 बजे हाथरस के लोकसभा सांसद अनूप प्रधान वाल्मीकि, भाजपा जिलाध्यक्ष समेत अन्य भाजपा नेता एसपी कार्यालय स्थित धरना स्थल पर पहुंचे और विहिप तथा बजरंग दल के पदाधिकारियों से वार्ता की। इसके बाद पुलिस अधीक्षक हाथरस चिरंजीव नाथ सिन्हा समेत कई पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से काफी देर तक बातचीत की। करीब रात एक बजे पुलिस अधीक्षक ने पूरे प्रकरण की जांच के लिए पांच सदस्यीय जांच कमेटी गठित करने का निर्णय लिया। कमेटी को पांच दिन के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही थाना हाथरस गेट प्रभारी नितिन कसाना पांच दिन के अवकाश पर चले गए। पुलिस की ओर से जांच कमेटी गठित किए जाने और थाना प्रभारी के अवकाश पर जाने के फैसले के बाद प्रदर्शनकारियों ने अपना धरना समाप्त कर दिया। हालांकि, मामले को लेकर संगठन के पदाधिकारी आगे की रणनीति पर चर्चा करते रहे। अब पूरे विवाद में सभी की नजर पांच सदस्यीय जांच कमेटी की रिपोर्ट पर टिकी हुई है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है।













