हाथरस 06 सितम्बर। सावन कृपाल रूहानी मिशन की हाथरस शाखा कृपाल आश्रम, गौशाला मार्ग पर आज आध्यात्मिक सत्संग का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संत-महात्माओं की वाणी को ऑडियो-वीडियो माध्यम से संगत तक पहुंचाया गया। इस दौरान दयाल पुरुष संत दर्शन सिंह जी महाराज की वाणी में ‘गुरु और आत्मा’ विषय पर आध्यात्मिक संदेश प्रसारित किया गया। संत दर्शन सिंह जी महाराज ने समझाया कि गुरु वह आध्यात्मिक शक्ति हैं, जो आत्मा को दुनियावी प्रेम से ऊपर उठाकर रूहानी प्रेम की ओर ले जाती है। गुरु के मार्गदर्शन में मनुष्य अपने वास्तविक आध्यात्मिक स्वरूप को पहचानने और परमात्मा से जुड़ने की दिशा में आगे बढ़ता है। इसी श्रृंखला में मिशन के प्रमुख एवं विश्व विख्यात संत राजिंदर सिंह जी महाराज का ‘आत्मा का परमात्मा से मिलन’ विषय पर सत्संग भी प्रसारित किया गया। महाराज जी ने कहा कि जब मनुष्य जीवन में कठिनाइयों से घिर जाता है तो वह उन्हें दूर करने के लिए हर संभव प्रयास करता है। लेकिन कई बार परिस्थितियां इतनी जटिल हो जाती हैं कि तमाम प्रयासों के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हो पाता। ऐसे समय में मनुष्य परमात्मा को याद करते हुए प्रार्थना करता है कि अब प्रभु के अतिरिक्त कोई दूसरा सहारा नहीं है। उन्होंने संदेश दिया कि गृहस्थ जीवन में रहते हुए अथवा संसार के किसी भी कोने में रहते हुए मनुष्य को अपना ध्यान बाहरी दुनिया से हटाकर अपने भीतर की दुनिया की ओर लगाना चाहिए। प्रभु हमसे दूर नहीं हैं और उन्हें पाने के लिए जंगलों या पहाड़ों में जाने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि वह हर पल और हर क्षण हमारे अंग-संग हैं। संत राजिंदर सिंह जी महाराज ने बताया कि प्रभु असीम और निराकार हैं। आध्यात्मिक दृष्टि से प्रभु के दो स्वरूप बताए गए हैं—ज्योति और श्रुति। शांत अवस्था में पहुंचकर साधना के माध्यम से मनुष्य अपनी आत्मा का अनुभव कर सकता है और इन आध्यात्मिक स्वरूपों का अनुभव करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि सच्चा एवं पूर्ण सतगुरु मनुष्य को अपनी शरण में लेकर आत्म-अनुभव की कुंजी प्रदान करता है और परमात्मा में लीन होने के मार्ग पर उसका मार्गदर्शन करता है।
जिले की अन्य शाखाओं में भी हुआ सत्संग
आध्यात्मिक कार्यक्रम की इसी कड़ी में जनपद हाथरस की अन्य दो शाखाओं—राजिंदर आश्रम, ग्राम वीर नगर एवं कृपाल आश्रम, ग्राम पिछोंती—में भी आध्यात्मिक सत्संग आयोजित किया गया। हाथरस शाखा पर सत्संग के साथ विभिन्न सामाजिक एवं आध्यात्मिक गतिविधियों का भी आयोजन किया गया। छोटे बच्चों के लिए बाल सत्संग, महिलाओं के लिए निःशुल्क राजिंदर सिलाई सेंटर, निःशुल्क कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र, निःशुल्क चिकित्सा सुविधा, दर्शन लाइब्रेरी, आध्यात्मिक पुस्तकों का स्टॉल तथा कृपाल प्याऊ की व्यवस्था की गई। कार्यक्रम के समापन के बाद उपस्थित संगत के लिए अटूट लंगर का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।












