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हाथरस 24 अगस्त । जनपद में जन्म प्रमाण पत्रों के पंजीकरण में बड़े स्तर पर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। प्रकरण में डिप्टी सीएमओ एमआई आलम ने हाथरस जंक्शन कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया है। मामला सीएचसी महौ में जन्म-मृत्यु पंजीकरण प्रक्रिया में सामने आई कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। मामला ग्राम महौं निवासी मनोज कुमार की शिकायत के बाद सामने आया। मनोज कुमार ने सीएचसी महौ में भ्रष्टाचार और अनैतिक वसूली का आरोप लगाते हुए सीएमओ हाथरस से शिकायत की थी। शिकायत के बाद सीएमओ ने मामले की जांच के लिए समिति गठित की। समिति ने जांच के बाद अपनी रिपोर्ट अधिकारियों को सौंप दी।

जांच में सामने आया कि सीएचसी महौ में जन्म-मृत्यु पंजीकरण का काम मोहित कुमार नामक निजी व्यक्ति और डाटा एंट्री ऑपरेटर गौरव कुमार द्वारा किया जा रहा था। शिकायतकर्ता की ओर से उपलब्ध कराए गए जन्म प्रमाण पत्रों की सीआरएस पोर्टल पर जांच की गई तो कई प्रमाण पत्रों में गंभीर विसंगतियां सामने आईं। जांच के अनुसार, एक जन्म प्रमाण पत्र की पंजीकरण संख्या बी-20179-56213-000076 है। इसमें पंजीकरण की तारीख 8 जुलाई 2017 और जन्म तिथि 1 मई 2017 दर्ज है, लेकिन जांच के दौरान यह प्रमाण पत्र 13 अगस्त 2026 को अपलोड किया हुआ पाया गया। इसके साथ सुरभि का प्रसव प्रमाण पत्र भी संलग्न था, जबकि रिकॉर्ड के अनुसार सुरभि का प्रसव 2 अगस्त 2025 को हुआ था।

इसी तरह नंदनी की जन्म तिथि 25 जनवरी 2017 वाले प्रमाण पत्र की पंजीकरण संख्या बी-20179-56200-000057 है। इसका पंजीकरण 20 दिसंबर 2017 को दर्ज है, लेकिन जांच में इसे भी 13 अगस्त 2026 को जारी किया गया दिखाया गया। इसके साथ सुरभि का प्रसव प्रमाण पत्र संख्या 36506 अपलोड पाया गया। जांच में एक और मामला सामने आया, जिसमें गीता देवी के नाम से दो बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र जारी किए गए। इनमें अरुण कुमार गौतम की जन्म तिथि 1 मई 2017 और हिमांशु गौतम की जन्म तिथि 1 अगस्त 2017 दर्ज है। दोनों प्रमाण पत्रों में मां का नाम गीता देवी दर्ज है और प्रमाण पत्र 8 जुलाई 2026 को जारी किए गए दिखाए गए। जांच समिति ने इसे गंभीर विसंगति माना।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि एक ही महिला के दो बच्चों का जन्म महज तीन महीने के अंतराल में होना संभव नहीं है। इसके अलावा जांच में सामने आया कि पीएचसी लाडपुर और देवीनगर में हुए जन्मों का पंजीकरण वहां के रजिस्ट्रार यानी प्रभारी चिकित्सा अधिकारी द्वारा नहीं किया जा रहा था। आरोप है कि इसके बजाय सीएचसी महौ की ओर से अपनी मुहर लगाकर इन जन्मों का पंजीकरण किया जा रहा था। जांच समिति ने इसे नियमों का उल्लंघन माना है।\ जांच रिपोर्ट के आधार पर डिप्टी सीएमओ एमआई आलम ने हाथरस जंक्शन कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस अब जन्म प्रमाण पत्रों के रिकॉर्ड, सीआरएस पोर्टल पर दर्ज विवरण, पंजीकरण प्रक्रिया और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की जांच करेगी। मामले में जांच के बाद ही अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति और जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।

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