
हाथरस 22 अगस्त। श्री रेवती मैया मेला के पावन अवसर पर ब्रह्माकुमारी तपस्या धाम की ओर से दाऊजी मंदिर परिसर में भव्य धर्म सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं एवं नगरवासियों ने सहभागिता कर आध्यात्मिक विचारों का लाभ लिया। कार्यक्रम के दौरान आध्यात्मिकता, प्रेम, भाईचारे, शांति और श्रेष्ठ संस्कारों का संदेश दिया गया। सम्मेलन के मुख्य वक्ता संत श्री श्रद्धानंद जी महाराज ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि सत्य, सदाचार, प्रेम, शांति, करुणा और मानव सेवा को जीवन में धारण करना ही सच्चा धर्म है। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य अपने विचारों को श्रेष्ठ बनाता है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव परिवार, समाज और राष्ट्र पर भी पड़ता है। उनके विचारों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को धर्म के वास्तविक स्वरूप को समझने और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम की संयोजक बी.के. भावना दीदी ने सम्मेलन के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आध्यात्मिक ज्ञान एवं राजयोग के माध्यम से मनुष्य अपने जीवन में शांति, सकारात्मकता और श्रेष्ठ संस्कारों को धारण कर सकता है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक चिंतन व्यक्ति को आंतरिक शक्ति प्रदान करता है और जीवन को सकारात्मक दिशा देता है। कार्यक्रम में बीके सीमा बहन ने “ढूंढ लें ठिकाना, आत्मा ढूंढ लें ठिकाना” सुंदर गीत प्रस्तुत कर आध्यात्मिक संदेश दिया। वहीं राजयोगिनी बीके सीता दीदी, जनपद प्रभारी हाथरस का मार्गदर्शन एवं आशीर्वचन प्राप्त हुआ। आगरा से हरिदत्त शर्मा ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।
कार्यक्रम का संचालन पूर्व बार एसोसिएशन अध्यक्ष एवं एडवोकेट अतुल आंधीवाल तथा डॉ. नीरज वार्ष्णेय ने किया। इस अवसर पर ग्राम पंचायत प्रधान श्यामवीर सिंह चौधरी सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं धर्मप्रेमी उपस्थित रहे। सम्मेलन में बांके बिहारी अपना वाले, समन्वयक अनिल कश्यप, कैलाश चंद्र एडवोकेट, धीरज वार्ष्णेय एडवोकेट, अशोक गुड़ वाले, मुकेश जेवरी, राम गुप्ता प्रेस वाले, मंजू शर्मा, आशू आंधीवाल, कुनाल वार्ष्णेय गुड़ वाले, डॉली पहलवान, चौधरी राजेंद्र सिंह एवं सेतू शर्मा सहित अनेक लोग उपस्थित रहे। अंत में ब्रह्माकुमारी तपस्या धाम, हाथरस की ओर से सभी अतिथियों एवं उपस्थित धर्मप्रेमी भाई-बहनों का आभार व्यक्त किया गया। सम्मेलन ने लोगों को आत्मिक शांति, श्रेष्ठ विचारों और मानवीय मूल्यों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।













