
हाथरस 16 अगस्त। सावन के पावन महीने में भगवान शिव की भक्ति के साथ-साथ कांवड़ यात्रा के कई अनोखे और भावुक कर देने वाले दृश्य देखने को मिल रहे हैं। हाथरस में भी एक ऐसी कांवड़ ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया, जिसमें आस्था के साथ बुजुर्गों के प्रति सम्मान और सेवा की अनूठी मिसाल देखने को मिली। दरअसल, हाथरस के मोहनपुरा-भूतपुरा गांव का एक नाती अपनी बुजुर्ग दादी रामबेटी को कांवड़ में बैठाकर गंगाजल के साथ अपने गांव लेकर जा रहा है। नाती की इस अनोखी कांवड़ को देखकर रास्ते से गुजर रहे लोग भी कुछ पल ठहरकर इस भावुक दृश्य को देखते नजर आए। इस कांवड़ में एक तरफ बुजुर्ग दादी रामबेटी बैठी हैं, जबकि दूसरी तरफ गंगाजल रखा गया है। नाती रामघाट से गंगाजल लेकर अपनी दादी को भी उसी कांवड़ में बैठाकर पैदल गांव की ओर रवाना हुआ है। नाती का कहना है कि “घर के बुजुर्ग भगवान का रूप होते हैं।” उसके लिए दादी की सेवा किसी तीर्थ से कम नहीं है। भगवान शिव को गंगाजल अर्पित करने के साथ-साथ वह अपनी दादी को भी सम्मान और श्रद्धा के साथ अपने घर लेकर जा रहा है। जहां सावन में हजारों कांवड़िए भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए गंगाजल लेकर निकलते हैं, वहीं इस नाती ने अपनी दादी को कांवड़ में साथ लेकर एक अलग ही संदेश दिया है—मंदिर में भगवान की पूजा करने से पहले घर के बुजुर्गों का सम्मान और सेवा भी उतनी ही जरूरी है। इस अनोखी कांवड़ ने न केवल लोगों का ध्यान खींचा, बल्कि यह भी संदेश दिया कि बुजुर्गों की सेवा ही सबसे बड़ी भक्ति है और माता-पिता व दादा-दादी का सम्मान हमारी संस्कृति की पहचान है। नाती की इस श्रद्धा और समर्पण की लोग जमकर सराहना कर रहे हैं। उसकी यह कांवड़ सावन की भक्ति यात्रा में एक ऐसी तस्वीर बन गई, जिसमें गंगाजल, भगवान शिव की आस्था और दादी के प्रति नाती का प्रेम—तीनों एक साथ नजर आ रहे हैं।










