
हाथरस 05 अगस्त । नगर पालिका परिषद हाथरस में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन की टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के मामले में शासन ने बड़ी कार्रवाई की है। शासन ने भाजपा की नगर पालिका अध्यक्ष श्वेता चौधरी को तत्काल प्रभाव से वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारों से वंचित कर दिया है। शासन के इस आदेश की जानकारी सामने आने के बाद नगर पालिका के गलियारों में खलबली मच गई। नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव पी. गुरुप्रसाद द्वारा जारी पत्र के अनुसार, नगर पालिका अध्यक्ष के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारों तथा कर्तव्यों का निर्वहन अब जिलाधिकारी हाथरस अथवा उनके द्वारा नामित ऐसे अधिकारी द्वारा किया जाएगा, जो डिप्टी कलेक्टर रैंक से नीचे का न हो।
35 वार्डों में कूड़ा कलेक्शन के लिए हुआ था टेंडर
नगर पालिका परिषद हाथरस के अंतर्गत 35 वार्डों में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए थे। टेंडर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं एवं पालिका के राजस्व को क्षति पहुंचाने के आरोप लगाते हुए सभासद मनीष अग्रवाल और सुनील अग्निहोत्री ने जिलाधिकारी के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच के लिए उप जिलाधिकारी सदर एवं वरिष्ठ कोषाधिकारी की दो सदस्यीय संयुक्त जांच समिति गठित की गई थी। समिति को टेंडर प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी।
जांच में नियमों की अनदेखी का दावा
जांच समिति की रिपोर्ट में टेंडर प्रक्रिया में व्यापक स्तर पर नियमों की अनदेखी किए जाने की पुष्टि होने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार टेंडर प्रक्रिया में कई गंभीर खामियां और नियम विरुद्ध कार्य पाए गए। शासन के आदेश में जांच समिति की रिपोर्ट को आधार बनाते हुए नगर पालिका अध्यक्ष के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की कार्रवाई की गई है।
जिलाधिकारी के अधीन रहेगी व्यवस्था
शासन के निर्देश के बाद अब नगर पालिका अध्यक्ष के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारों तथा कर्तव्यों का निष्पादन जिलाधिकारी हाथरस या उनके द्वारा नामित डिप्टी कलेक्टर रैंक से नीचे न होने वाले अधिकारी द्वारा किया जाएगा। शासन की इस कार्रवाई के बाद नगर पालिका परिषद में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। अब देखना होगा कि टेंडर प्रक्रिया में सामने आई अनियमितताओं को लेकर आगे क्या कार्रवाई होती है और नगर पालिका की डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन व्यवस्था किस प्रकार संचालित की जाती है।








