
हाथरस 02 अगस्त । ग्लोरी गार्डन कॉलोनी निवासी मधुशंकर अग्रवाल ने मंदिर में पूजा-अर्चना और दर्शन से रोके जाने का आरोप लगाते हुए सिविल कोर्ट में प्रकीर्ण वाद दायर किया है। वादी का कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत उन्हें तथा कॉलोनी के अन्य लोगों को धार्मिक स्वतंत्रता एवं पूजा-अर्चना का अधिकार प्राप्त है। प्रकरण में शनिवार को सिविल जज (वरिष्ठ प्रभाग) की अदालत में सुनवाई हुई। कोर्ट ने मामले में अपना पक्ष रखने के लिए शासकीय अधिवक्ता सिविल को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को निर्धारित की गई है।
कॉलोनाइजर के खिलाफ पहले दर्ज हो चुकी है रिपोर्ट
मामले की पृष्ठभूमि में नगर पालिका परिषद हाथरस द्वारा ग्लोरी गार्डन के कॉलोनाइजर मनोज यादव के खिलाफ 26 जुलाई को रिपोर्ट दर्ज कराए जाने का भी उल्लेख किया गया है। आरोप है कि चकरोड, नाली एवं पोखर की भूमि को घेरने के मामले में प्रशासनिक जांच के बाद यह कार्रवाई की गई थी। ग्लोरी गार्डन निवासी मधुशंकर अग्रवाल का आरोप है कि जांच के दौरान 24 जुलाई को प्रतिवादी पक्ष के अधीनस्थों ने उन्हें और अन्य श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश करने तथा पूजा-अर्चना करने से रोक दिया। वादी के अनुसार, उन्हें भविष्य में भी मंदिर में पूजा न करने की धमकी दी गई।
निर्बाध दर्शन और पूजा के लिए स्थायी निषेधाज्ञा की मांग
मधुशंकर अग्रवाल ने इस संबंध में 30 जुलाई को सिविल जज (वरिष्ठ प्रभाग) की अदालत में प्रदेश सरकार, जिलाधिकारी, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका तथा कॉलोनाइजर मनोज यादव के खिलाफ वाद दायर किया। वाद में मंदिर तक निर्बाध आवागमन, दर्शन और पूजा-अर्चना किए जाने की अनुमति सुनिश्चित करने के लिए स्थायी निषेधाज्ञा जारी किए जाने की मांग की गई है। वादी की ओर से बताया गया कि सरकार एवं प्रशासनिक अधिकारियों के विरुद्ध सिविल वाद दायर करने से पहले सामान्यतः धारा 80(2) सीपीसी के तहत नोटिस की प्रक्रिया का प्रावधान है। हालांकि, वादी के अनुसार मामला धार्मिक भावनाओं से जुड़ा होने के कारण अदालत ने मामले की तात्कालिकता को देखते हुए उक्त प्रक्रिया से छूट प्रदान करते हुए प्रकीर्ण वाद दर्ज कर लिया। मामले में सुनवाई के लिए 1 अगस्त की तारीख निर्धारित की गई थी। शनिवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने शासकीय अधिवक्ता सिविल को नोटिस जारी करते हुए प्रकरण में अपना पक्ष रखने के लिए कहा है। अब मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी। फिलहाल मामला न्यायालय में विचाराधीन है और अदालत के समक्ष दोनों पक्षों का पक्ष आने के बाद ही प्रकरण में आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।










