
हाथरस 02 अगस्त । साइबर ठगों ने बेसिक शिक्षा विभाग की एक शिक्षिका को कथित रूप से डिजिटल अरेस्ट करने की कोशिश की। ठग ने खुद को बीएसए कार्यालय का वरिष्ठ लिपिक बताते हुए शिक्षिका को स्थानांतरण का डर दिखाया और महज 10 मिनट के भीतर 40 हजार रुपये भेजने का दबाव बनाया। हालांकि शिक्षिका ने समझदारी दिखाते हुए पहले मामले की विभागीय स्तर पर छानबीन की, जिसके बाद उन्हें साइबर ठगी की कोशिश का पता चला। मामला 31 जुलाई का बताया जा रहा है। दोपहर करीब तीन बजे कोतवाली हाथरस गेट क्षेत्र के अहवरनपुर प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक गिर्राज किशोर के पास एक फोन आया। कॉल करने वाले ने अपना नाम नरेंद्रपाल बताते हुए खुद को बीएसए कार्यालय में वरिष्ठ लिपिक बताया। बताया गया है कि फोन करने वाले ने प्रधानाध्यापक से उनके विद्यालय के साथ-साथ ग्राम पंचायत के अन्य विद्यालयों के संबंध में भी जानकारी जुटाई। इसके बाद कथित ठग ने चालाकी से नयाबांस में तैनात एक शिक्षिका का मोबाइल नंबर हासिल कर लिया और सीधे उन्हें फोन कर दिया।
शिकायत और ट्रांसफर का डर दिखाकर बनाया दबाव
शिक्षिका को फोन करने के बाद कॉलर ने कथित तौर पर उन्हें डराते हुए कहा कि उनके खिलाफ शिकायत हुई है और उनका स्थानांतरण सिकंदराराऊ किया जा रहा है। इसी दौरान उन्हें दबाव में लेने की कोशिश की गई और 10 मिनट के अंदर 40 हजार रुपये एक खाते में डालने के लिए कहा गया। अचानक स्थानांतरण और रुपये जमा करने के दबाव से शिक्षिका को शक हुआ। उन्होंने घबराने के बजाय पहले बीएसए कार्यालय से मामले की जानकारी करने का निर्णय लिया। कार्यालय में छानबीन करने पर स्पष्ट हुआ कि विभाग की ओर से इस तरह की कोई कार्रवाई नहीं की जा रही थी। इसके बाद शिक्षिका को समझ आया कि साइबर ठगों द्वारा बीएसए कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी के नाम का इस्तेमाल कर उन्हें ठगने का प्रयास किया जा रहा था। शिक्षिका की सूझबूझ और समय रहते विभाग से सत्यापन करने के कारण वह साइबर ठगी का शिकार होने से बच गईं।
विभागीय नाम और पद का इस्तेमाल कर रहे साइबर ठग
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि साइबर अपराधी अब सरकारी विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम का इस्तेमाल कर लोगों पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं। पहले विभाग से जुड़े कर्मचारियों से जानकारी हासिल करना और फिर उसी आधार पर शिक्षिका को डराना ठगों की सुनियोजित रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है। साइबर अपराध से बचने के लिए किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के नाम से फोन आने पर बिना सत्यापन के पैसे ट्रांसफर न करें। किसी भी धमकी, स्थानांतरण या कार्रवाई के नाम पर तत्काल निर्णय लेने के बजाय संबंधित विभाग के आधिकारिक माध्यम से जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है।










