
हाथरस 30 जुलाई। एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक ह्यूमन राइट्स के राष्ट्रीय महासचिव प्रवीन वार्ष्णेय ने डिजिटल युग में बढ़ते फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स और साइबर अपराधों पर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव को ई-मेल भेजकर सख्त कानून बनाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि फर्जी और भ्रामक सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए लोगों को ठगा जा रहा है, अफवाहें फैलाई जा रही हैं और समाज में भ्रम की स्थिति उत्पन्न की जा रही है। प्रवीन वार्ष्णेय ने अपने पत्र में कहा कि एक व्यक्ति कई फर्जी आईडी बनाकर अफवाह फैलाने, साइबर ठगी, महिलाओं के साथ अभद्रता और देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम दे सकता है। ऐसे मामलों में पुलिस के लिए आरोपियों तक पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है क्योंकि अधिकांश फर्जी अकाउंट नकली मोबाइल नंबरों से बनाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि इससे देश की सुरक्षा, सामाजिक सौहार्द और बच्चों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने समाधान के रूप में सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स (X), यूट्यूब और व्हाट्सएप के अकाउंट को आधार आधारित ओटीपी सत्यापन से जोड़ने का सुझाव दिया। उनका कहना है कि इससे फर्जी अकाउंट बनने पर रोक लगेगी, साइबर अपराधों में कमी आएगी, गलत पोस्ट करने वालों की पहचान आसान होगी और बच्चों के अकाउंट अभिभावकों के आधार से लिंक होने पर उनकी सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। इसके अलावा उन्होंने नए अकाउंट के लिए आधार आधारित ओटीपी सत्यापन अनिवार्य करने, एक डिवाइस से सीमित संख्या में अकाउंट बनाने की व्यवस्था, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए फर्जी प्रोफाइल की पहचान, शिकायतों पर 24 घंटे में कार्रवाई, स्कूल-कॉलेजों में डिजिटल नागरिकता की शिक्षा, आधार सत्यापित उपयोगकर्ताओं को वेरिफाइड बैज देने, राजनीतिक विज्ञापनों में खर्च करने वालों की जानकारी सार्वजनिक करने तथा सोशल मीडिया कंपनियों का डेटा भारत में सुरक्षित रखने जैसे सुझाव भी दिए हैं। पत्र के अंत में प्रवीन वार्ष्णेय ने केंद्र सरकार से “सोशल मीडिया अकाउंट वेरिफिकेशन बिल” लाकर सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आधार आधारित सत्यापन की व्यवस्था लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे डिजिटल भारत अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और जिम्मेदार बन सकेगा।





