
हाथरस 29 जून । ब्रज की देहरी हाथरस स्थित जैन गली के श्री जगन्नाथ धाम में भगवान श्री जगन्नाथ की परंपरागत अनासरा (विश्राम) लीला आरंभ हो गई है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्री जगन्नाथ 108 कलशों के जलाभिषेक के बाद ज्वरग्रस्त हो जाते हैं। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए मंदिर के कपाट आगामी 15 दिनों के लिए बंद कर दिए गए हैं और प्रभु को पूर्ण विश्राम कराया जा रहा है। मंदिर के महंत पंडित राम कुमार शर्मा ने बताया कि लगभग 222 वर्ष पूर्व जगन्नाथ पुरी से लाए गए भगवान श्री जगन्नाथ के विग्रह की परंपरा के अनुसार इन दिनों प्रभु की विशेष सेवा की जा रही है। भगवान को रोगमुक्त करने के लिए प्रतिदिन काली मिर्च, सोंठ, मुलैठी, तुलसी, केसर, सौंफ सहित विभिन्न दिव्य औषधियों से तैयार काढ़ा अर्पित किया जा रहा है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ मास की भीषण गर्मी में भगवान श्री जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का 108 कलशों से महाभिषेक होने के बाद वे अस्वस्थ हो जाते हैं। इसके पश्चात उन्हें पूर्ण रोगी मानकर विश्राम कराया जाता है। इस अवधि में भगवान को छप्पन भोग या अन्य व्यंजन नहीं लगाए जाते, बल्कि केवल औषधीय काढ़े का ही भोग अर्पित किया जाता है। महंत ने बताया कि भगवान के विश्राम में किसी प्रकार का व्यवधान न हो, इसलिए मंदिर में शंख, घंटा, घड़ियाल, मृदंग एवं अन्य वाद्य यंत्रों का प्रयोग भी बंद कर दिया गया है। आरती भी शांत वातावरण में संपन्न कराई जा रही है। धार्मिक परंपरा के अनुसार स्वास्थ्य लाभ के उपरांत 16 जुलाई को भगवान श्री जगन्नाथ भव्य रथयात्रा पर आरूढ़ होकर अपनी मौसी के घर (गुंडीचा यात्रा) के लिए प्रस्थान करेंगे। मंदिर प्रशासन ने सभी धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से रथयात्रा में शामिल होकर भगवान के दर्शन एवं पुण्य लाभ प्राप्त करने का आग्रह किया है।
























