हाथरस 08 जून । ग्रामीण बैंकों के कर्मचारियों एवं अधिकारियों की लंबे समय से लंबित मांगों के समाधान की मांग को लेकर ग्रामीण बैंक यूनियनों के संयुक्त मंच यूनाइटेड फोरम ऑफ ग्रामीण बैंक यूनियंस (UFGBU) ने देशव्यापी आंदोलनात्मक कार्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया है। संगठन का कहना है कि कई बार आश्वासन मिलने के बावजूद मांगों के निस्तारण की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। संयुक्त मंच द्वारा उठाई जा रही प्रमुख मांगों में मानव संसाधन (HR) नीति में आवश्यक संशोधन, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRB) कर्मचारियों के लिए स्पॉन्सर बैंक स्टाफ सर्विस रेगुलेशन का विस्तार, 12वें बाइपार्टाइट सेटलमेंट एवं 9वें जॉइंट नोट का पूर्ण क्रियान्वयन, एपीआर (APR) प्रणाली में सुधार, निष्पक्ष एवं पारदर्शी स्थानांतरण नीति लागू करना, दैनिक वेतनभोगी एवं कैजुअल कर्मचारियों का नियमितीकरण तथा अन्य लंबित मांगों का शीघ्र निस्तारण शामिल है।
यूनाइटेड फोरम ऑफ ग्रामीण बैंक यूनियंस ने बताया कि इन मांगों को भारत सरकार, वित्त मंत्रालय, वित्तीय सेवा विभाग (DFS), नाबार्ड तथा अन्य संबंधित प्राधिकरणों के समक्ष कई बार उठाया जा चुका है। इसके अतिरिक्त मुख्य श्रम आयुक्त एवं उप मुख्य श्रम आयुक्त के समक्ष भी कई दौर की सुलह वार्ताएं आयोजित की गईं। प्रत्येक बैठक में मांगों के समाधान का आश्वासन दिया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इसी के विरोध में संयुक्त मंच ने चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है। आंदोलन के प्रथम चरण के अंतर्गत 8 जून से 12 जून 2026 तक “RRBs Demands Day” मनाया जाएगा। इस दौरान कर्मचारियों एवं अधिकारियों से अपनी मांगों के समर्थन में बैज धारण करने, शाखाओं एवं कार्यालयों में एकजुटता प्रदर्शित करने तथा कार्यक्रम से संबंधित गतिविधियों की तस्वीरें साझा करने की अपील की गई है। AIGBEA एवं AIGBOA के संयुक्त आह्वान पर सभी पदाधिकारियों और सदस्यों से अपने-अपने क्षेत्रीय कार्यालयों एवं शाखाओं में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने तथा आंदोलन को सफल बनाने का अनुरोध किया गया है। संयुक्त मंच ने विश्वास व्यक्त किया है कि कर्मचारियों एवं अधिकारियों की एकता, संघर्ष और संगठनात्मक शक्ति के बल पर उनकी न्यायोचित मांगों का शीघ्र समाधान संभव हो सकेगा।

























