सिकंदराराऊ (हसायन) 05 जून । कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) परिसर में तैनात विषय वस्तु विशेषज्ञों एवं कृषि वैज्ञानिकों द्वारा इन दिनों ‘खेत बचाओ अभियान’ कार्यक्रम जोर-शोर से संचालित किया जा रहा है। इसी श्रृंखला में शुक्रवार को केंद्र परिसर में ग्रामीण किसानों के लिए एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. एस.आर. सिंह के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। जागरूकता कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित कृषि वैज्ञानिक डॉ. बलवीर सिंह, डॉ. आकांक्षा सिंह, डॉ. हरविंदर पाल एवं डॉ. शैलजा देवी ने किसानों को मृदा परीक्षण (मिट्टी की जांच) के महत्व एवं उससे होने वाले दूरगामी लाभों के बारे में विस्तार से तकनीकी जानकारी प्रदान की।
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को समझाते हुए कहा कि नियमित रूप से मृदा परीक्षण कराने से खेत की वास्तविक उर्वरता और उसमें मौजूद पोषक तत्वों की सही स्थिति की जानकारी प्राप्त होती है। इससे किसान अपने खेतों में अंधाधुंध खाद डालने के बजाय संतुलित मात्रा में रासायनिक व जैविक उर्वरकों का प्रयोग कर सकते हैं। ऐसा करने से जहां एक ओर फसल उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि होगी, वहीं दूसरी ओर खेती की बढ़ती उत्पादन लागत में भी भारी कमी लाई जा सकती है। कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों को सरकार द्वारा संचालित ‘मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना’ (Soil Health Card Scheme), उचित पोषक तत्व प्रबंधन तथा भूमि की उपजाऊ क्षमता को लंबे समय तक बनाए रखने के विभिन्न वैज्ञानिक उपायों के बारे में जागरूक किया। किसानों को प्रेरित किया गया कि वे अपने खेतों की मिट्टी की समय-समय पर जांच अवश्य कराएं और वैज्ञानिकों द्वारा दी गई सिफारिशों व परामर्श के अनुसार ही उन्नत खेती करें।
इस जागरूकता कार्यक्रम में क्षेत्र के गांव शेखपुरा से आए अनेक प्रगतिशील किसानों ने सक्रिय रूप से सहभागिता की। कार्यक्रम के अंतिम सत्र में किसानों ने खेती-किसानी और मिट्टी से जुड़ी अपनी विभिन्न समस्याओं व जिज्ञासाओं को वैज्ञानिकों के सामने रखा, जिसका विशेषज्ञों द्वारा मौके पर ही सरल समाधान किया गया। उपस्थित किसानों ने इस आयोजन को बेहद उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताते हुए कृषि विज्ञान केंद्र से भविष्य में भी गांव स्तर पर ऐसे जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कराने की अपेक्षा व्यक्त की।























