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सादाबाद 19 मई । कस्बे से होकर गुजरने वाली ऐतिहासिक करवन नदी की बदहाल स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों ने प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। नगरवासियों ने तहसीलदार एवं नगर पंचायत अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपकर नदी की नियमित सफाई, अतिक्रमण हटाने तथा सौंदर्यीकरण की मांग की है। ज्ञापन में बताया गया कि केंद्र और प्रदेश सरकार की नमामि गंगे कार्यक्रम तथा राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं के बावजूद सादाबाद की करवन नदी लगातार प्रदूषण और उपेक्षा का शिकार बनी हुई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर से निकलने वाला घरेलू कचरा, प्लास्टिक अपशिष्ट तथा औद्योगिक इकाइयों का रासायनिक अपशिष्ट सीधे नदी में प्रवाहित किया जा रहा है। इसके अलावा नगर में संचालित चीनी और गुड़ मिलों का अपशिष्ट भी बिना शोधन के नदी में डाले जाने की शिकायत की गई है। नगर पंचायत स्तर पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) जैसी प्रभावी व्यवस्था न होने के कारण गंदा पानी सीधे नदी में गिर रहा है, जिससे जल गुणवत्ता लगातार प्रभावित हो रही है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि करवन नदी के पुराने और नए पुलों के आसपास तेजी से अतिक्रमण बढ़ रहा है। पुलों के किनारों पर किए गए अवैध कब्जों के कारण नदी का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित हो रहा है और जल प्रवाह में भी बाधा उत्पन्न हो रही है। नगरवासियों का कहना है कि इस ऐतिहासिक नदी के संरक्षण के लिए अब तक प्रशासनिक, सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं दिखाई दी है। उन्होंने मांग की है कि करवन नदी की नियमित सफाई कराई जाए, अतिक्रमण हटाया जाए तथा नदी को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। साथ ही औद्योगिक एवं घरेलू अपशिष्ट को नदी में गिरने से रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था लागू की जाए।

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