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हाथरस 19 मई। भीषण गर्मी और लू के प्रकोप के बीच मंगलवार को जिला अस्पताल परिसर में एक बड़ा हादसा हो गया। यहाँ लगे मुख्य ट्रांसफार्मर में अचानक भीषण आग लग जाने से पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। सुबह करीब 11 बजे हुए इस हादसे के बाद पूरे अस्पताल की बिजली गुल हो गई, जिससे करीब चार घंटे तक स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित रहीं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंगलवार सुबह करीब 11 बजे अस्पताल परिसर में लगे मुख्य ट्रांसफार्मर से अचानक तेज चिंगारियां उठने लगीं और देखते ही देखते उसने भीषण आग का रूप ले लिया। आग की लपटें उठती देख अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। अस्पताल के कर्मचारियों ने तुरंत फायर एक्सटिंग्विशर (अग्निशमन यंत्रों) की मदद से आग पर काबू पाने का प्रयास किया। सूचना पर पहुंची दमकल (फायर ब्रिगेड) की टीम ने करीब 20 मिनट की कड़ी मशक्कत के बाद आग को पूरी तरह बुझाया। गनीमत यह रही कि आग समय रहते बुझ गई और अस्पताल के मुख्य भवन तक नहीं पहुंची, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। 45 डिग्री तापमान में तड़पे मरीज, टॉर्च की रोशनी में हुआ इलाज: वर्तमान में पारा 45 डिग्री सेल्सियस के पार होने और उमस बढ़ने के कारण जिला अस्पताल के वार्डों में भर्ती मरीजों की हालत बदतर हो गई। बिजली कटने से वार्डों के पंखे और कूलर पूरी तरह बंद हो गए। मेडिकल, सर्जिकल, चाइल्ड वार्ड और ओपीडी (OPD) समेत अस्पताल के अधिकांश हिस्सों में घाना अंधेरा छा गया। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को मोबाइल की फ्लैशलाइट और टॉर्च की रोशनी में मरीजों का उपचार करना पड़ा। इमरजेंसी वार्ड में गंभीर मरीजों को ड्रिप चढ़ाने और प्राथमिक उपचार देने का काम भी मोबाइल की रोशनी के सहारे ही चलता रहा। जांच सेवाएं ठप, बिना इलाज लौटे मरीज: बिजली आपूर्ति ठप होने का सबसे बड़ा असर अस्पताल की तकनीकी सेवाओं पर पड़ा। एक्स-रे, सीटी स्कैन और पैथोलॉजी जांच सेवाएं पूरी तरह बंद हो गईं। इसके चलते दूर-दराज के गांवों से आए सैकड़ों मरीज घंटों इंतजार करने के बाद बिना जांच और इलाज कराए ही वापस लौटने को मजबूर हो गए। सीमित जनरेटर बैकअप ने खोली पोल: हादसे के करीब एक घंटे बाद अस्पताल प्रशासन द्वारा जनरेटर चालू कराया गया, लेकिन उसकी क्षमता सीमित होने के कारण केवल इमरजेंसी वार्ड, ऑपरेशन थिएटर (OT) और लेबर रूम में ही बिजली की वैकल्पिक आपूर्ति की जा सकी। अस्पताल के बाकी सभी सामान्य वार्ड और महत्वपूर्ण विभाग लंबे समय तक बिना बिजली के ही प्रभावित रहे, जिसने अस्पताल के पावर बैकअप के दावों की पोल खोलकर रख दी है।

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