सिकंदराराऊ (हसायन) 17 मई । कोतवाली हाथरस जंक्शन की सीमान्तर्गत निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित माया पालीटेक्निक के सामने यू.पी.सीडा में राजवाहे बम्बा के सडक किनारे अंदर खड़े करीब दो दर्जन चौबीस पच्चीस की संख्या में खडे हुए हरे भरे छायादार प्रतिबंधित विभिन्न प्रजातियों में शामिल छायादार नीम,आम,पीपल के हरे वृक्षो को बिना अनुमति लिए ही हाथरस रेंज के क्षेत्रीय वन विभाग के कुछ जिम्मेदार कर्मचारियों की तथाकथित मिलीभगत से आरी चलवाकर कटान करा दिया गया।ग्रामीण व राहगीरों की सूचना पर वन विभाग के अधिकारियों ने कार्रवाई से बचने के लिए दो ट्रैक्टर ट्रालियों में भरे हुई प्रतिबंधित प्रजाति के हरे छायादार वृक्षों के कटान के दौरान वन माफियाओं के द्वारा लादी गई लकडियों सहित मौके पर पकडकर हाथरस के लिए ले गए।वन विभाग के जिम्मेदारों के द्वारा लकडी माफियाओं से तथाकथित मिलीभगत के चलते एक वाहन को छोड दिए जाने की चर्चाएं व्याप्त है।इस संबंध में जिला वनाधिकारी राकेश चन्द्र ने बताया कि कल जो वृक्ष कटे हुए मिले है,उनमें स्टूकेस जुर्माना जारी कर दिया गया है।मौके पर एक ट्रैक्ट्रर ट्राली वाहन भी पकडा गया है।वह टैक्ट्रर वन विभाग के कैंपस में खडा कराकर जुर्माना काटा जा रहा है।कुछ दिन पहले भी कटे हुए करीब दस वृक्ष उस पर भी कार्रवाई की जा रही है।निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्ग पर कोतवाली हसायन व हाथरस जंक्शन क्षेत्र की सीमान्तर्गत गांव बेहटा व लक्ष्मपुर गाँव के निकट स्थित यूपी सीडा सलेमपुर औधोगिक क्षेत्र में से बिना अनुमति लिए कुछ दिन पहले दो हरे भरे प्रतिबंधित प्रजाति के पीपल के पेड़ काटने की सूचना पर क्षेत्रीय वनकर्मी मौके पर आए।वन कर्मियों को मौके पर हरे छायादार प्रतिबंधित विभिन्न प्रजातियों के स्तर वाले वृक्षों की कटी लकडियां पडीं हुई मिली।लेकिन वन विभाग के द्वारा आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गई।वर्तमान में शनिवार को यू.पी.सीडा सलेमपुर औधोगिक क्षेत्र में हरे भरे प्रतिबंधित प्रजाति के पेड़ों को काटने की सूचना मिलने पर वन विभाग हाथरस रेंज से वन कर्मियो ने हरे छायादार प्रतिबंधित वृक्षों के कटान होने की जानकारी पर मौके पर पहुंचकर दो ट्रैक्टर ट्राली भरी लकडियों के माल को जब्त कर वन विभाग के जिला वनाधिकारी के कार्यालय ले गए।यू.पी.सीडा सलेमपुर औधोगिक क्षेत्र में करीब दो दर्जन चौबीस की संख्या में शामिल हरे भरे प्रतिबंधित प्रजाति के छायादार वृक्षों का अवैध रूप से कटान कर आरी चलवा दी गई।चौबीस के करीब प्राचीन प्रतिबंधित छायादार वृक्षों के कटान के बाद वातावरण को खतरे की ओर धकेलवा दिया।यू.पी.सीडा के द्वारा औद्योगिक परिक्षेत्र स्थापित करने के लिए परिक्षेत्र में खडे छायादार वृक्षों का कटान तो करा दिया गया।मगर यूपीसीडा के द्वारा परिक्षेत्र मे एक भी वृक्ष छायादार की रोपाई भी नही कराई गई।क्षेत्र से कटते जा रहे हरे छायादार वृक्ष के कारण पर्यावरण व वातावरण खतरे की ओर बढते हुए मौसमी बेरूखी की ओर अग्रसर होता जा रहा है।वन विभाग के कर्मचारियो व जिम्मेदारों की वन माफियाओं के साथ मिलीभगत होने के कारण हर रोज कटान किया जा रहा है।जबकि वन विभाग के द्वारा शासन प्रशासन के आदेश पर हर वर्ष होने वाले छायादार पौधों का वृक्षारोपण भी अनदेखी उदासीनता के कारण विकसित होने के बजाए सूखकर दम तोडते जा रहे है।वन माफियाओं के द्वारा हरे छायादार वृक्षों का कटान किए जाने के दौरान वन विभाग के द्वारा हर बार कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई किए जाने के बजाए लकड़ी कटान के कार्य का जुर्माना काट कर खाना पूर्ति कर मामले को रफा दफा कर दिया जाता है।इस कारण लकड़ी माफियाओं के होसले बुलंद होते जा रहे हैं।वन विभाग की कही तथाकथित मिलीभगत व अनदेखी के चलते क्षेत्र में हरे भरे प्रतिबंधित प्रजाति के पेड़ों को दिन रात में धडल्ले से काटा जा रहा है।उत्तर प्रदेश सरकार प्रतिवर्ष पर्यावरण सुरक्षा व हरियाली बढाने हेतु तमाम अभियान चलाते हुए करोड़ों रुपये खर्च कर वृक्ष पौधे लगाए जाते हैं। लेकिन सरकार की मंशा को लकड़ी माफिया पानी फेरने में लगे हुए।वन विभाग की तथाकथित मिलीभगत के कारण लकड़ी माफियाओं पर कड़ी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। वन विभाग अपने कमाऊ पुतो पर कार्रवाई करने में असमर्थ दिखाई दे रहे हैं।