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सादाबाद 12 मई । बिसावर में करीब 76 वर्ष पुराना आयुर्वेदिक अस्पताल बदहाल स्थिति में है। कभी आसपास के गांवों और कस्बों के लोगों को सुलभ एवं सस्ता इलाज उपलब्ध कराने वाला यह अस्पताल अब खंडहर में बदल चुका है। क्षेत्रवासियों में इसकी दुर्दशा को लेकर चिंता जताई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, वर्ष 1950 में बिसावर के मजरा नगला मदारी निवासी दानवीर सेठ रामसहाय ने अपनी कमाई से इस अस्पताल का निर्माण कराया था। उन्होंने इसे समाज सेवा के लिए जिला परिषद मथुरा को समर्पित कर दिया था। उस समय यह अस्पताल दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के लिए एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र था। वर्ष 1997 में हाथरस जनपद के गठन के बाद से अस्पताल पर प्रशासनिक स्तर पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। जनपद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी के कारण धीरे-धीरे अस्पताल की सेवाएं बंद हो गईं और अब यह पूरी तरह से निष्क्रिय पड़ा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस ऐतिहासिक अस्पताल को पिछले कई वर्षों से स्थायी कूड़ाघर बना दिया गया है। बिसावर के जिला पंचायत सदस्य ईशान चौधरी और समाजसेवी मनोज पंसारी सहित अन्य प्रमुख लोगों ने स्वास्थ्य विभाग के जनपदीय प्रशासन से इस जर्जर आयुर्वेदिक अस्पताल के पुनरुद्धार और दोबारा संचालन की मांग की है। अस्पताल के पुनर्निर्माण के लिए अब क्षेत्र के लोग एकजुट हो रहे हैं।युवाओं, बुजुर्गों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में लोगों से इस जनहित की मुहिम को मजबूत बनाने की अपील की है। उनका कहना है कि यदि क्षेत्र के लोग एकजुट होकर आवाज उठाएंगे, तो शासन-प्रशासन को अस्पताल के पुनरुद्धार के लिए कदम उठाने पड़ेंगे।

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