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सिकंदराराऊ (हसायन) 05 मई । एक ओर प्रदेश सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाकर वृक्षारोपण अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर हाथरस के विकासखंड क्षेत्र में वन विभाग और लकड़ी माफियाओं का ‘गठजोड़’ हरियाली को निगल रहा है। तथाकथित विभागीय मिलीभगत के चलते प्रतिबंधित प्रजाति के हरे-भरे वृक्षों का खुलेआम कत्लेआम किया जा रहा है। आज हसायन क्षेत्र के गाँव सिडरमई में सरकारी नलकूप के पास लकड़ी माफियाओं ने बेखौफ होकर प्रतिबंधित प्रजाति के पीपल के दो विशाल पेड़ों को जड़ से काट दिया, जबकि तीसरे पेड़ को काटने की तैयारी चल रही थी। इसी तरह सिदामई गांव में नाले के पास एक खेत से नीम, जामुन, अर्जुन और आम के हरे-भरे पेड़ों पर आरी चला दी गई। क्षेत्र में सुबह होते ही माफिया इलेक्ट्रॉनिक कटर और कुल्हाड़ी लेकर निकल पड़ते हैं, लेकिन विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगती।

क्षेत्र में चर्चा का विषय यह है कि अवैध कटान में शामिल माफिया खुद स्वीकार कर रहे हैं कि वे वन विभाग के जिम्मेदारों को फोन पर सूचना देने के बाद ही पेड़ काटना शुरू करते हैं। माफियाओं का कहना है कि “बिना विभाग के पूछे हम किसी वृक्ष को छू भी नहीं सकते।” यह बयान स्पष्ट करता है कि रक्षक ही भक्षक बने हुए हैं। क्षेत्र में कई अवैध आरा मशीनें धड़ल्ले से चल रही हैं। वहीं, कुछ पंजीकृत आरा मशीन संचालक भी मानकों को ताक पर रखकर प्रतिबंधित लकड़ी का क्रय-विक्रय कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पूर्व में पकड़े गए ट्रैक्टर-ट्रालियों को भी बिना किसी ठोस कार्रवाई के छोड़ दिया गया, जिससे माफियाओं के हौसले सातवें आसमान पर हैं। इस पूरे प्रकरण के संबंध में सिकंदराराऊ रेंज वनाधिकारी (रेंजर) दिलीप कुमार ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। बीट प्रभारी को तत्काल मौके पर भेजकर प्रतिबंधित वृक्ष कटान की विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है। जांच के बाद दोषियों के खिलाफ जल्द ही आवश्यक और कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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