
हाथरस 02 मई । विकासखंड क्षेत्र सासनी के ग्राम नगला उम्मेद में किसानों को आधुनिक और टिकाऊ खेती के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से एक विशेष अभियान चलाया गया। कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) हाथरस और भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान (IIFSR) मोदीपुरम, मेरठ के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित इस कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने उर्वरकों के संतुलित उपयोग और फसल प्रबंधन की बारीकियों को साझा किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्य वक्ता और कृषि वैज्ञानिक डॉ. बलवीर सिंह ने किसानों को चेतावनी देते हुए कहा कि उर्वरकों का अंधाधुंध उपयोग न केवल लागत बढ़ा रहा है, बल्कि मिट्टी की उर्वरक शक्ति को भी नष्ट कर रहा है। उन्होंने जोर दिया कि किसान भाई पहले मृदा परीक्षण (Soil Testing) कराएं और रिपोर्ट के आधार पर ही आवश्यक उर्वरक डालें।
रासायनिक और जैविक खादों का समन्वय जरूरी
आईआईएफएसआर के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. आशीष कुमार पृष्टि और डॉ. मोहम्मद आरिफ ने भविष्य की खेती के लिए रासायनिक व जैविक खादों के समन्वित उपयोग को अनिवार्य बताया। डॉ. रंजित ने यूरिया के अत्यधिक प्रयोग से होने वाले दुष्प्रभावों की जानकारी देते हुए बताया कि सूक्ष्म पोषक तत्वों का संतुलन फसल के स्वास्थ्य और बेहतर उत्पादन के लिए अत्यंत आवश्यक है।
बागवानी और सब्जियों से बढ़ेगी आय
वैज्ञानिक डॉ. बलवीर सिंह और डॉ. रंजित एच.वी. ने किसानों को सब्जियों और बागवानी फसलों के बेहतर प्रबंधन के गुर सिखाए। उन्होंने बताया कि कैसे किसान वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर खेती की लागत कम कर सकते हैं और अपनी पैदावार को दोगुना कर सकते हैं। इस दौरान संस्थान के विशेषज्ञ शिवम राठी ने भी महत्वपूर्ण तकनीकी सहयोग प्रदान किया।
56 किसानों ने लिया उन्नत खेती का संकल्प
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी 56 किसानों को उन्नत कृषि प्रणालियों को अपनाने और पर्यावरण के अनुकूल खेती करने का संकल्प दिलाया गया। वैज्ञानिकों ने किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान किया और भविष्य में भी तकनीकी सहयोग का आश्वासन देते हुए आभार व्यक्त किया।





















