
इस्लामाबाद/वॉशिंगटन 12 अप्रैल । ईरान के साथ शांति वार्ता विफल होने के तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कड़ा और ऐतिहासिक फैसला लेते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिकी नौसेना द्वारा नाकेबंदी (Blockade) करने का आदेश दे दिया है। यह कदम वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और पश्चिम एशिया की स्थिरता के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान में हुई 21 घंटे की मैराथन वार्ता में ईरान द्वारा परमाणु कार्यक्रम न छोड़ने के अड़ियल रुख के कारण यह कड़ा निर्णय लेना अनिवार्य हो गया था।
जहाजों की होगी सघन जांच, टोल देने वालों पर नजर
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने आदेश में कहा कि अब अमेरिकी नौसेना होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले हर जहाज को रोककर उसकी जांच करेगी। विशेष रूप से उन जहाजों को निशाना बनाया जाएगा जो ईरान को ‘अवैध’ टोल या शुल्क दे रहे हैं। ट्रंप ने ईरान द्वारा जहाजों से पैसे लेने की प्रक्रिया को ‘वैश्विक जबरन वसूली’ करार दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि जो जहाज ईरान को टोल देंगे, उन्हें अमेरिका सुरक्षित रास्ता नहीं देगा। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य ईरान की आर्थिक कमर तोड़ना और उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करना है।
बारूदी सुरंगों का दावा और ‘नर्क’ भेजने की चेतावनी
ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने समुद्र में बारूदी सुरंगें (Sea Mines) बिछा दी हैं, जिससे व्यापारिक जहाजों के लिए खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने सख्त लहजे में कहा, “अगर किसी ने अमेरिकी या शांतिपूर्ण जहाजों पर हमला करने की कोशिश की, तो उन्हें नर्क भेज दिया जाएगा।” उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस नाकेबंदी में जल्द ही अन्य मित्र देश भी अमेरिका के साथ शामिल हो सकते हैं।
परमाणु मुद्दे पर टूटा समझौता
वार्ता की विफलता का मुख्य कारण बताते हुए ट्रंप ने कहा कि 20 घंटे से अधिक चली बातचीत में लगभग सभी मुद्दों पर सहमति बन गई थी, लेकिन परमाणु कार्यक्रम पर पेंच फंस गया। उन्होंने दोहराया कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं देगा। ईरान द्वारा परमाणु संवर्धन स्थायी रूप से बंद न करने के फैसले ने ही वार्ता को अंतिम रूप से विफल कर दिया।
सैन्य गतिविधियां तेज, वैश्विक संकट की आहट
शनिवार को अमेरिकी सेना ने होर्मुज के रास्ते से अपने दो युद्धपोत गुजारे और बारूदी सुरंगों को हटाने का अभियान शुरू कर दिया है। 21 अप्रैल को सीजफायर खत्म होने से पहले ही इस नाकेबंदी के आदेश ने दुनिया भर के बाजारों में हलचल मचा दी है। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है और वैश्विक शेयर बाजारों पर इसका नकारात्मक असर पड़ेगा।

























