सिकंदराराऊ (हसायन) 09 अप्रैल । जनपद में शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी, समान और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में जिलाधिकारी द्वारा एनसीईआरटी (NCERT) पाठ्यक्रम को बढ़ावा देने के आदेश का व्यापक स्वागत किया जा रहा है। सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) के अधिवक्ता और कस्बा हसायन के मोहल्ला अहीरान निवासी पुष्पेंद्र वीर प्रताप सिंह ने इस निर्णय को जनहित में एक क्रांतिकारी कदम बताया है। अधिवक्ता पुष्पेंद्र वीर प्रताप सिंह ने कहा कि एनसीईआरटी की पुस्तकें अनिवार्य होने से शिक्षा व्यवस्था में एकरूपता आएगी। वर्तमान में कई निजी विद्यालय ‘बुक कमीशन सिस्टम’ के चलते निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकें अभिभावकों पर थोप रहे हैं। विद्यालय प्रबंधन और पुस्तक विक्रेताओं के बीच चलने वाली इस साठगांठ के कारण आम आदमी पर अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़ता है। एनसीईआरटी की पुस्तकें सस्ती और देशभर में आसानी से उपलब्ध हैं, जिससे हर वर्ग का छात्र समान स्तर की शिक्षा प्राप्त कर सकेगा।
अधिवक्ता सिंह ने जिलाधिकारी से अपील की है कि इस आदेश का धरातल पर सख्ती से पालन सुनिश्चित कराया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि एक विशेष निरीक्षण टीम गठित की जाए जो निजी विद्यालयों का नियमित रूप से औचक निरीक्षण करे। यदि किसी विद्यालय में एनसीईआरटी के अतिरिक्त अन्य महंगी पुस्तकें अनिवार्य पाई जाती हैं, तो संबंधित स्कूल प्रबंधन के विरुद्ध सख्त प्रशासनिक एवं विधिक कार्यवाही की जानी चाहिए। उनका मानना है कि एक समान पाठ्यक्रम लागू होने से शिक्षा में व्याप्त असमानता समाप्त होगी। इससे न केवल शिक्षा का स्तर सुधरेगा, बल्कि शिक्षा क्षेत्र में व्याप्त व्यावसायिक अनियमितताओं पर भी प्रभावी रोक लगेगी। उन्होंने जिला प्रशासन से इस दिशा में शीघ्र ठोस कदम उठाने का आग्रह किया है ताकि प्रत्येक बच्चे को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।






















